जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की रस्साकशी तेज हो गई है। आधे से ज्यादा सदस्य भूमिगत हैं। जो सामने हैं उनकी खरीद-फरोख्त की जा रही है। इनको दावत के बहाने बुलाकर दावेदार अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं। दावतों का यह दौर शनिवार से शुरू हो गया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो चुकी है। राजनीतिक दलों की निगाह इस चुनाव पर गड़ चुकी है। सपा के पूर्व विधायक वाचस्पति ने अपनी पत्नी मधुपति को सपा सरकार में जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया था। बड़ी शान से उन्होंने अध्यक्ष पद की कुर्सी पत्नी को दिलवाई थी। भाजपा सरकार आते ही राह में तमाम मुश्किलें खड़ी हो गईं।
अनामिका सिंह ने एकदम से मोर्चा खोल दिया था। नतीजतन मधुपति को इस्तीफा देना पड़ा था। यही कारण है कि अब 23 जुलाई को इस पद के लिए चुनाव होगा। पूर्व विधायक एक बार फिर से पूरी ताकत से मैदान में आ चुके हैं। हालांकि भीतर खाने भाजपा में आने के बाद भी भाजपाई वाचस्पति की राह में रोड़े अटकाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं अनामिका सिंह ने भी कुर्सी पर कब्जा करने के लिए चक्रव्यूह रचना शुरू कर दिया है।
कुल 29 सदस्यों को वोट डालना है। इनमें से अधिकांश सदस्य अचानक भूमिगत हो गए हैं। कुछ सदस्य ही देखे जा रहे हैं। इन सदस्यों को शनिवार को एक दावत में बुलाया गया। दावत बहाना था। वोट को लेकर सीधे वार्ता हुई। कई मुद्दों पर चर्चा भी हुई। इससे दूसरा खेमा चिंतित है।
हालांकि दावत के बहाने बुलाए गए सदस्यों से क्या वार्ता हुई इसकी जानकारी दूसरे खेमे को है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शह और मात का खेल शुरू है। हालांकि चुनाव मैदान में कौन-कौन लोग हैं यह स्थिति 17 जुलाई को नामांकन के बाद ही साफ होगी।
सपा-बसपा की भी है पैनी नजर
सपा और बसपा की निगाह इस चुनाव पर है। सपा व बसपा के नेता फिलहाल इस चुनाव को लेकर अभी खामोश हैं। माना जा रहा है कि नामांकन के बाद इन दोनों पार्टियों के नेता सामने आएंगे। संभावना जताई जा रही है कि यदि भाजपा की ओर से मधुपति के नाम की घोषणा हुई तो सपा व बसपा के नेता दूसरे गुट में जा सकते हैं। पार्टी रणनीति के हिसाब से इस चुनाव में सपा-बसपा के सदस्य उतर सकते हैं।