मंझनपुर। पानी की बड़ी समस्या है। हैंडपंप तो घर के सामने ही है, लेकिन खराब होने पर दिक्कतें बढ़ जाती हैं। घर से करीब 500 मीटर दूर एक सरकारी नलकूप है। वहीं से पानी ढोकर लाना पड़ता है। यह बातें इचौली के राम सुमेर कह ही रहे थे, कि तभी सीता देवी बोल पड़ीं। गंवई भाषा में बोलीं कि सुना रहय टंकी बनी अउर पाइप से पानी आई। पता नहीं कबै वा दिन आई। अबहिन तो काम चल जात है। गर्मी मा बहुत परेशानी होत है। कमोवेश यही कहना उर्मिला और सुमित्रा का भी है। कहा कि पानी की बहुत दिक्कत है। एक हैंडपंप है, वह बिगड़ जाए तो बाल्टी से पानी ढोना पड़ता है।
यह समस्या सिर्फ एक इचौली गांव की नहीं, बल्कि जनपद की सभी 451 ग्राम पंचायतों में है। हैंडपंप तो हैं, लेकिन इनसे काम नहीं चल पा रहा है। केंद्र सरकार ने जब जल जीवन मिशन से घर-घर पानी पहुंचाने की घोषणा की तो ग्रामीणों में उम्मीद जगी। लगा कि शायद अब समस्या दूर हो जाएगी। जिले में भी मिशन के तहत 300 टंकी बनवाने और करीब तीन हजार किमी पाइप लाइन बिछाने का लक्ष्य जल निगम को मिला।
वर्ष 2021 में कार्यदायी संस्थाएं निर्धारित करके काम शुरू करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद तो पेयजल की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों के सपनों को पंख लग गए, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही ने इस पर पानी फेर दिया। आलम यह है कि पहले साल अधिकारियों ने केवल डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने में गुजार दिए। करीब 250 करोड़ की परियोजना की कच्छप गति का ही परिणाम रहा कि अब तक एक भी गांव में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। शासन ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए वर्ष 2024 तक का समय दिया है। अब जल निगम के पास दो साल ही शेष हैं। अधिकारियों की हीलाहवाली का दंश ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है।
कार्यदायी संस्थाओं पर अफसर नहीं कस पा रहे शिकंजा
जिले में आठ ब्लॉक हैं। इनमें से सिराथू, मंझनपुर, नेवादा, चायल और सरसवां समेत पांच ब्लॉक की जिम्मेदारी बाबा कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिली है। जबकि कड़ा, मूरतगंज और कौशाम्बी का काम कार्यदायी संस्था जेएमसी के पास है। दोनों को ही जनवरी-2021 में काम सौंपा गया था। बाबा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने छह महीने रफ्तार पकड़ी। जबकि बाबा कंस्ट्रक्शन पहले से काम कर रही है। फिर भी कोई ऐसा गांव नहीं हैं, जहां जल जीवन मिशन के तहत पानी पहुंचा हो। कार्यदायी संस्थाओं की ढिलाई से गांवों में लोग पेयजल के लिए परेशान हैं, लेकिन अधिकारी शिकंजा नहीं कस रहे हैं।
64 स्थानों पर हुई बोरिंग, टंकी एक भी तैयार नहीं
जिले में जल जीवन मिशन के तहत अब तक 64 स्थानों पर बोरिंग कराई जा चुकी है। पानी की टंकी एक भी तैयार नहीं हुई। जबकि लक्ष्य 300 पानी की टंकी बनाने है। लगभग 11 जगहों पर पानी की टंकी का निर्माण चल रहा है। जल निगम को वर्ष 2024 तक 3000 किमी पाइप लाइन बिछाना है। अब तक केवल 250 किमी पाइप लाइन बिछाई जा सकी है।
जल जीवन मिशन पर एक नजर
-जनपद में कुल विकास खंड - 08
-जनपद में कुल ग्राम पंचायतें- 451
-निर्माण के लिए प्रस्तावित पानी की टंकी- 300
-गांवों में बिछाने जानी है पाइप लाइन- 3000 किमी
-मिशन के तहत कार्यों की लागत- करीब 250 करोड़
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वर्ष 2021 में जल जीवन मिशन का काम शुरू हुआ था। दो कार्यदायी संस्थाओं को जिम्मेदारी दी गई है। अब तक किसी भी गांव में पेयजल आपूर्ति नहीं हो सकी है। वर्ष 2024 तक काम पूरा करना है। इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।-सौमित्र, एक्सईएन, जल निगम