मोदी सरकार के पहले बजट से अच्छे दिन की उम्मीद रखने वालों को झटका लगा है। बजट में मंहगाई को कम करने का उपाय नहीं देख कौशाम्बी के लोगों ने तो निराशा जाहिर की है। घरेलू महिलाएं, दुकानदार और नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि उम्मीद थी कि बजट के बाद आसमान छू रही रोजमर्रा की कीमतों में लगाम लगेगी। पर, वित्तमंत्री ने जो बजट पेश किया है, उससे तो मंहगाई और उछलेगी।
नवोदय स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य सैयद अजादार हुसैन ने मोदी सरकार के बजट पर निराशा जताई है। कहा कि सर्विस टैक्स में करीब दो फीसदी का इजाफा किए जाने से सभी वस्तुएं की कीमतें अपने आप बढ़ जाएंगी। लोगों को जरूरत के सामानों के लिए और अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। कहा कि मोदी ने भाषणों में मंहगाई कम करने का वादा किया था। बजट ने जनता से किया उनका वादा तोड़ दिया है।
रिजवी कालेज करारी में बीएसी तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रही निशात फातिमा ने कहाकि वित्त मंत्री ने स्किल डेवलपमेंट स्कीम चलाने, प्रत्येक घर के एक सदस्य को 2022 तक नौकरी का जो उल्लेख अपने बजट में किया है। यदि उसे वे पूरा करते हैं, तो यह एक अच्छा बजट हो सकता है।
मंझनपुर के नेतानगर निवासी कपड़ा व्यापारी रामचंद्र केसरवानी ने भी बजट से निराशा जताई है। कहा कि बजट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे आमजन को मंहगाई से तनिक भी राहत मिलने वाली हो। कहा कि बजट में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कम उत्पादकर देने का प्रस्ताव है। इससे घरेलू, कुटीर उद्योग के सामने महंगे होंगे।
उद्यान विभाग के लिपिक सुनील कुमार ने कहा कि आमबजट में उम्मीद थी कि आयकर का दायरा मोदी सरकार बढ़ाएगी। पर, उन्होंने पुराना दायरा बरकरार रखा है। इससे नौकरी पेशा लोगों की मुश्किल और बढ़ गई हैं। कहा कि इस मंहगाई के युग में सारी कमाई खाने-पहनने में ही निकल जा रही है। इसके लिए बजट में कुछ नहीं किया गया है।
मंसूरनगर की रहने वाली गृहणी प्राची गुप्ता भी दवा समेत ज्यादा सामानों की कीमतें बढ़ने की उम्मीद से परेशान है। उसका कहना है कि मंहगाई चरम पर है। यह दिन-ब-दिन और बढ़ती जा रही है। मोदी ने कहा था कि मंहगाई से निजात मिलेगी। पर, हुआ कुछ नहीं।