प्रदेश के प्राइमरी से इंटर तक के स्कूलों में अब बच्चों को मोबाइल की लत से छुटकारा दिलाने के लिए किताबों से जोड़ने की पहल शुरू होने जा रही है। शिक्षा विभाग ने किताब संग बचपन अभियान की रूपरेखा तैयार की है, जिसका उद्देश्य न केवल शैक्षिक सुधार, बल्कि अभिभावकों की बढ़ती चिंता को भी कम करना है।
अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थसारथी सेन शर्मा ने सभी विद्यालयों को इस अभियान को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। बीएसए कमलेंदु कुशवाहा ने बताया कि सभी ब्लॉकों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं। अभियान का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। शिक्षकों से भी अपेक्षा है कि वे खुद पठन संस्कृति को बढ़ावा दें।
यह पहल विद्यार्थियों में एकाग्रता, अभिव्यक्ति और पठन संस्कृति को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ उन्हें डिजिटल के मोह से निकालकर विचार, ज्ञान और संवेदना की वास्तविक दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि हर सप्ताह छात्रों को पाठ्यक्रम से इतर किताबें जैसे कहानी, जीवनी, विज्ञान या बाल साहित्य पढ़ने के लिए दी जाएंगी। प्रार्थना सभा में छात्रों से उनकी पसंदीदा किताबों के बारे में पूछा जाएगा, ताकि उनमें साझा करने और प्रेरित होने की भावना विकसित हो।
साथ ही अब किसी प्रतियोगिता में अव्वल आए बच्चों को ट्रॉफी या गुलदस्ते की बजाय किताबें ही पुरस्कार स्वरूप देने की बात कही गई है, ताकि पठन संस्कृति को सम्मान और प्रतिष्ठा मिले।
- पढ़ाई के बहाने फोन लेकर बच्चे घंटों रील्स या गेम में खो जाते हैं। यह लत अब डराने लगी है। हर घर की यही कहानी है। -अभिभावक संध्या जायसवाल
यह मुहिम मोबाइल बनाम किताब की नहीं, बल्कि भविष्य बनाम भटकाव की लड़ाई है। इससे बच्चे एकांकी हो रहे हैं। -अभिभावक रिंपल शर्मा
लगातार स्क्रीन पर रहने से बच्चों की स्मरण-शक्ति, संवाद-कौशल और नींद तीनों प्रभावित होती हैं। इसलिए यह अभियान बहुत जरूरी है। -चिकित्सक डॉ. सुएब अंसारी
संध्या जायसवाल
संध्या जायसवाल