गांवों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास का सर्वे हो गया। सत्यापन के बाद कुछ पात्र लाभार्थियों के नाम पात्रता सूची में दर्ज भी हो चुके हैं और कुछ के खाते में आवास की पहली किश्त भी आ चुकी है। लेकिन कुछ पात्र लोग अब भी सरकारी आवास पाने की आस लगाए बैठे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शुक्रवार को नेवादा ब्लाक के कुछ गांवों में पड़ताल की तो कुछ ऐसी ही व्यथा लोगों ने बयां की।
केस एक
मोहम्मदाबाद गांव के मजरा नंदा का पुरवा की बुजुर्ग केशपति निषाद ने बताया कि वह पति कुल्लू के साथ बच्चों से अलग रहती हैं।छोटी सी जगह में सर्दी में तिरपाल डालकर जिंदगी काट रही हैं। केशपति के मुताबिक कई बार आवास के लिए अधिकारियों से गुहार लगा चुकीं हैं, लेकिन अधिकारी सिर्फ वादा करते हैं, आवास नहीं देते।
केस दो,
नंदा का पुरवा गांव के नीरज कुमार पुत्र समयलाल ने बताया कि वह आवासहीन हैं। माता-पिता से अलग पत्नी बच्चों के साथ रहते हैं। मां के नाम कुछ महीना पहले आवास मिल चुका है। लेकिन उन्हें घर नहीं मिला। नीरज के मुताबिक पात्र होने के बाद भी अधिकारी मां के नाम आवास दिए जाने का हवाला देकर मना कर देते हैं। ऐसे में किसी तरह तिरपाल डालकर गुजर बसर कर रहे हैं।
केस तीन
पिपरहटा गांव के मिथलेश पुत्र अभयराज ने बताया कि वह कई वर्षों से परिवार समेत घास फूस की झोपड़ी में तिरपाल डालकर गुजर बसर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई बार आवास योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया तब जाकर इस बार की आवास सूची में उनका नाम दर्ज हुआ है। मिथलेश का कहना है कि सूची में तो नाम दर्ज हो गया लेकिन अभी आवास बनाने के लिए पैसा खाते में नहीं आया, चिंता अब भी सता रही है कि पता नहीं पक्का आशियाना मिल पाएगा या नहीं।
केस चार
पिपरहटा गांव के ही रहने वाले संतराज ने बताया कि घर की माली हालत ठीक नहीं है। किसी तरह एक खपरैल नुमा कच्चे कमरे में गुजर बसर हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार आवास सूची में नाम तो दर्ज है लेकिन पता नहीं कब से सरकारी छत के नीचे जीवनयापन हो पायेगा।
प्रधानमंत्री आवास के सर्वे का कार्य और सत्यापन किया जा रहा है। इसके उपरांत पात्रता सूची गांवों के खुली बैठक और कार्रवाई से होते हुए शासन को भेजी जाएगी। वहां से अनुमोदित होने के बाद सभी पात्र लाभार्थियों को बारी-बारी से आवास मिलना शुरू हो जायेगा। जो वास्तविक रूप से पात्र हैं उनका नाम सूची में जरूर शामिल कराया जाएगा। -संजय कुमार गुप्ता , बीडीओ नेवादा।
तिरपाल में रात काटने को मजबूर मिथलेश। संवाद
तिरपाल में रात काटने को मजबूर मिथलेश। संवाद
तिरपाल में रात काटने को मजबूर मिथलेश। संवाद