जिले के यमुना घाटों पर चल रहे अवैध खनन को रोकने के लिए सोमवार की रात को डीएम एक बार फिर निकले। एसपी के साथ उन्होंने चायल सर्किल के कई बालू घाटों पर छापेमारी की। डीएम की सख्ती का असर रहा कि सभी घाटों पर बालू का अवैध खनन बंद हो गया है। डीएम की सख्ती का असर रहा कि घाटों पर दिन रात गरजने वाली पोकलैंड और जेसीबी गायब हो गईं। बालू माफिया ने घाटों को छोड़कर सुरक्षित ठौर ले रखी है।
जिले में ओवर लोड परिवहन और बालू के अवैध खनन का कारोबार धड़ल्ले से संचालित हो रहा था। मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। कई दिनों तक जिले से बाहर रहे डीएम मुख्यालय पहुंचे तो उनकी नजर अखबार में प्रकाशित खबरों पर पड़ी। मामले को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने एसपी के साथ रविवार की रात ओसा चौराहा से महेवाघाट तक सघन चेकिंग अभियान चलाकर 28 ट्रकों को पकड़ा।
इससे जिले भर के बालू कारोबारियों और बालू परिवहन करने वाले ट्रक मालिकों में हड़कम्प मच गया। अवैध खनन और ओवर लोड परिवहन की हकीकत खंगालने के लिए डीएम, एसपी सोमवार की रात चायल सर्किल में रहे। उन्होंने पिपरी के ब्यूर, सेवढ़ा, रुसहाई और सराय अकिल के तिल्हापुर, महरनिया आदि बालू घाटों के खनन पर पैनी नजर रखी। रात दो बजे तक एक भी ट्रक न मिलने और घाटों पर सन्नाटा मिलने पर डीएम, एसपी मुख्यालय लौटे। निरीक्षण के दौरान इन अफसरों के साथ एसडीएम चायल अश्वनी कुमार श्रीवास्तव, सीओ चायल रामभवन यादव, तहसीलदार चायल, एसओ सराय अकिल पीके यादव, पिपरी महेंद्र कुमार मय फोर्स मौजूद रहे। डीएम अखंड प्रताप सिंह का कहना है कि दोआबा में घाटों पर बालू के एक भी पट्टे नहीं हैं। न्यायालय ने भी खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रहा है। ऐसे में यदि जिले के घाटों पर बालू खनन और सड़कों पर परिवहन मिला तो कार्रवाई तय है। इसके लिए सम्बंधित मातहतों को कड़े निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।