मंझनपुर। एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे सपा-बसपा के लामंबद हो जाने से कौशाम्बी संसदीय सीट का चुनावी परिदृष्य बदल गया है। 2014 के मोदी लहर पर भले ही कौशाम्बी संसदीय सीट पर कमल का फूल खिला हो। पर, पिछले दो दशक से यहां की सियासत पर सपा-बसपा का ही दबदबा रहा है। ऐसे में इन दोनों दलों के पास खासा मजबूत वोट बैंक है। गुजरे चुनावों का आकलन करें तो साफ नजर आता है कि सपा-बसपा ने यदि गठबंधन धर्म निभाया तो मुकाबला एकतरफा हो जाएगा। हालांकि इस इस चुनाव में सियासी सीन बदला है। क्योंकि बसपा के तारनहार पार्टी छोड़कर सपा से खुद चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि सपा के लिए माहौल एकतरफा करने वाले राजा भइया ने खुद नई पार्टी बनाकर चुनावी समर में अपना प्रत्याशी उतार दिया है।
कौशाम्बी संसदीय सीट 2009 से पहले तक लोकसभा क्षेत्र चायल के नाम से जानी जाती थी। उस वक्त प्रयागराज (इलाहाबाद) की शहर पश्चिमी तथा फतेहपुर जिले की खागा विधानसभा का कुछ हिस्सा इसी संसदीय क्षेत्र में शामिल था। पर, नए परिसीमन के बाद प्रयागराज और फतेहपुर की विस सीटें काटकर प्रतापगढ़ की कुंडा और बाबागंज को शामिल कर दिया गया है। दलित बहुल दोआबा में पहली बार कमल का फूल वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में खिला था। इसके दो साल बाद ही 98 के मध्यावधि चुनाव में बाजी पलट गई। इस चुनाव में सपा ने संसदीय सीट पर कब्जा कर लिया। तब से 2009 तक हुए लोकसभा चुनावों में सीट कभी सपा तो कभी बसपा के खाते में रहती थी। सिर्फ 2014 के मोदी लहर में ही भाजपा वापसी कर सकी।
इस बीच एक बात सामने आई कि कौशाम्बी में सपा-बसपा गठबंधन का मजबूत वोट बैंक है। क्योकि 96 के बाद से अब तक हुए छह चुनावों पर नजर डालें तो सपा-बसपा को मिले मतों का जोड़ भाजपा को मिले वोट से बहुत ज्यादा रहा। हालांकि,इसमें बड़ा योगदान कुंडा के निर्दल विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और बसपा से चार बार विधायक रहे इंद्रजीत सरोज का है। पर, मौजूदा वक्त में दोनों सियासी क्षत्रपों ने अपने-अपने दलों से किनारा कर लिया है। राजा भइया ने जहां खुद जनसत्ता पार्टी गठित कर अपना उम्मीदवार उतार दिया है। वहीं इंद्रजीत सरोज भी बसपा छोड़कर खुद सपा गठबंधन से प्रत्याशी हैं। ऐसे में गठबंधन के बावजूद कौशाम्बी संसदीय सीट के मौजूदा सियासी परिदृष्य में भारी बदलाव है। फिर भी माना जा रहा है कि दोनों दलों ने चुनाव में यदि ईमानदारी के साथ गठबंधन धर्म निभाया तो मुकाबला बेहद दिलचस्प होना तय है।