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Kaushambi News: चार साल में खेत से बारूद की बस्ती बन गया था मनौरी बाजार

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चार साल पहले मनौरी बाजार के जिन खेतों में फसलें लहलहाती थीं। धीरे-धीरे वहां बारूद की बस्ती बन गई। भूमाफिया ने किसानों को कुछ पैसे देकर उनकी जमीन पर प्लॉटिंग शुरू कर दी। किस्तों पर प्लॉट बिके, घर बनते गए। इन्हीं के बीच मौत का सामान भी जमा होता रहा। नतीजा यह हुआ कि महमूदपुर मनौरी में धमाका हुआ और बस्ती उजड़ गई।
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हादसे में उजड़े परिवार के बचे सदस्यों ने पूरी कहानी बयां की तो सिस्टम की अनदेखी सामने आने लगी। हादसे में चार बच्चों को खोने वाले मीरपुर के गया प्रसाद ने बताया कि गरीबी के कारण उनके पास रहने के लिए घर नहीं था। गांव के ही एक जमीन कारोबारी ने कम पैसे और किस्त में प्लॉट देने की बात कही तो उन्होंने कुछ रुपये देकर महमूदपुर मनौरी के खेत में घर बनवा लिया। अंदाजा नहीं था कि आसपास जमा बारूद एक दिन उनके बच्चों को खा जाएगा।
ऐसा ही बातें पॉली निवासी बैंक कैशियर मंजीत कुमार और मृतक रेलकर्मी विक्रम के परिजनों ने बताईं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अवैध पटाखा गोदाम और फैक्टरी के लिए नौशाद और उसके बेटे का कई बार विरोध किया तो धमकाकर उन्हें शांत करा दिया गया। पुलिस और राजस्व विभाग से शिकायत करने में भी लोग हिचकिचाते रहे।
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12 पुलिस कर्मी और आठ राजस्व कर्मियों पर अब तक कार्रवाई
मंझनपुर। पटाखा विस्फोट मामले में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन 12 पुलिस कर्मी और आठ राजस्व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। प्रशासन का मानना है कि वर्ष 2024 में आरोपी नौशाद के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद से दोबारा संचालित होने वाले पटाखे के अवैध कारोबार के कारण हुए हादसे में लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की गई है। संवाद
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