परिषदीय स्कूल 28 से खुल रहे हैं। स्कूल खुलने के बाद से कोई विद्यार्थी अगर लगातार तीन दिनों तक विद्यालय नहीं आता तो उसे बुलाने शिक्षक घर जाएंगे। हर विद्यालय में बच्चे की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
जिले के 1091 परिषदीय स्कूलों में करीब 1.85 लाख बच्चों का पंजीकरण है। स्कूलों में बच्चे अक्सर किसी न किसी बहाने से विद्यालय से गायब रहते हैं। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान स्कूल में छात्र संख्या कम होने की बात सामने आती है। इसे लेकर निर्देश भी दिया जाता है, लेकिन कोई सुधार नहीं होता है। ऐसे में अब राज्य परियोजना निदेशक ने स्कूल में लगातार तीन दिन तक स्कूल नहीं आने वाले बच्चे के घर शिक्षकों को भेजने का फैसला लिया है। शिक्षक बच्चे को बुलाने के लिए उसके घर जाएंगे। हालांकि शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध किया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला संयोजक ओमदत्त त्रिपाठी का कहना है कि शिक्षकों का कक्षा छोड़ कर एक छात्र को बुलाने उसके घर जाना अव्यवहारिक है। अभिभावक भी शिक्षक की मजबूरी समझता है। ऐसे में अन्य कई कार्य प्रभावित होंगे। वहीं, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह का कहना है कि स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। अब छात्रों के बुलाने का भी काम शिक्षक करेंगे तो पढ़ाई कैसे होगी। इस काम के लिए रसोइयां, एसएमसी सदस्य अथवा किसी अन्य को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
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स्कूलों में 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। हर बच्चों को नियमित स्कूल आना होगा। शिक्षक इसे अपनी जिम्मेदारी मानकर काम करें। किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। - डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा, बीएसए