बाढ़ में कटैया गांव के बाहर डूबी फसल।
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जलस्तर बढ़ने पर आवगमन के लिए लगानी पड़ेगी डोंगी
यमुना नदी का जल स्तर बढ़ने पर मल्हीपुर, बेनपुर, कटैया, डिहवा, गड़ेरियन का पूरा के लोगों के आवगमन के लिए किलनहाई नदी पुल पर डोंगी लगानी पड़ेगी। इन गांव के लोगों का आने जाने का मात्र यही एक रास्ता है। बाढ़ आने पर सबसे अधिक स्कूली बच्चों को होती है। वह नाव से नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं।
किलनहाई नदी रपटा पुल पर बाढ़ के पानी से होकर गुजरते वाहन।
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पुल निर्माण से आधा दर्जन गांव के लोगों को मिलेगी राहत
चकपिंहा गांव स्थित किलनहाई नदी की तलहटी में 20 फिट नीचे पांच ह्यूम पाईप लगाकर रपटा पुल बनाया गया है। जबकि ग्रामीण अरसे से नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहें हैं। हर साल यमुना नदी में बाढ़ आने पर कटैया, मल्हीपुर, डिहवा, गड़ेरियन का पुरवा, बेनपुर के 5000 लोगों को मुशीबत झेलनी पड़ती है।
मल्हीपुर के पूर्व प्रधान हीरालाल, देशराज, कटैया निवासी फरीद अहमद, अफगान और शकील अहमद ने बताया की साल 2013 में पानी छोड़े जाने से नदी में आई बाढ़ के दौरान सैकड़ों ग्रामीणों ने किलनहाई नदी पर पुल बनाने की मांग की थी। लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जबकि बाढ़ के दौरान संपर्क मार्ग कटने से स्कूली छात्र और छात्राओं को नांव के सहारे स्कूल आना जाना होता है। लोगो की रोजमर्रा की जरुरतो की खरीदारी के लिए बाजार आने जाने में मुशीबत उठानी पड़ती है। पुल निर्माण से इस मुशीबत से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
दो साल पहले बाढ़ में डूबी फसलों का नहीं मिला मुआवजा
वर्ष 2022 में भी यमुना नदी में उफान आया था। उस समय भी किलनहाई नदी ने तबाही मचाया था। बाढ़ के पानी में तराई क्षेत्र के मल्हीपुर, कटैया, पिपरहटा, डिहवा, मोहम्मदाबाद आदि गांवों के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा दलहनी व तिलहनी फसलें डूबकर नष्ट हो गई थीं। तहसील प्रशासन की ओर से राजस्व टीम ने किसानों की खराब हुई फसलों के नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजा था। कुछ किसानों को तो खराब फसल की मुआवजा राशि उनके खातों में आ गई, लेकिन कई किसान ऐसे भी हैं जो तहसील का चक्कर लगाते लगाते मायूस हो चुके हैं।
मल्हीपुर गांव के मोतीलाल, फूलचंद्र, पुरषोत्तम, रामचंद्र, रामप्रताप, राम समुंदर, श्यामलाल, राम बहादुर, रविचंद्र पिपरहटा के फूलचंद्र, जगदीश उमरवल गांव के पंचमलाल, रामबाबू कटैया के जुल्फिकार हुसैन अकबराबाद गांव के मूलचंद्र, सुकुरी देवी आदि किसानों के मुताबिक लेखपाल को कई बार खतौनी समेत जरूरी कागजात देने के बाद भी आज तक उन्हें बाढ़ में खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिला। मुआवजा राशि मिलने की आस में तहसील प्रशासन का चक्कर काटते हुए वह थक चुके हैं।