मंझनपुर। सौभाग्य योजना से जिले में कराए गए विद्युतीकरण के नाम पर बडे़ पैमाने पर खेल किया गया है। जितने गांवों में विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा गया। वह भले ही पूरे नहीं हो सके हों, लेकिन आधे-अधूरे काम के बीच फाइनल एमबी कराने की तैयारी की जा रही है।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय और सौभाग्य योजना से जिले के गांवों में विद्युतीकरण कराया गया है। पंडित दीन दयाल योजना से करीब 1310 गांवों में विद्युतीकरण करना था। इसी तरह सौभाग्य योजना से जिले के करीब 1688 मजरों में विद्युतीकरण कराने के साथ ही लोगों को मुफ्त में कनेक्शन दिया जाना था। बिजली विभाग का दावा है कि सौभाग्य योजना से 50 हजार लोगों को कनेक्शन दिया गया। बताया जाता है कि दोनों योजनाओं के तहत शासन से मिले 167 करोड़ के बजट को भी कार्यदाई संस्था मेसर्स विश्वनाथ व एल एंड टी खर्च नहीं कर सकी। 31 मार्च तक एल एंड टी ने 1375 मजरों में ही काम कराए जाने का दावा किया। जिसमें कंपनी की तरफ से आठ सौ मीटर तार और पांच सौ नए ट्रांसफार्मर लगाने का दावा किया गया, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी किसी भी गांव में काम पूरा नहीं कर सकी है। एल एंड टी के डिस्ट्रिक इंचार्ज रूपेश कुमार का कहना है कि अब तक उन्होंने जो भी काम कराए हैं, विभाग ने उसका भुगतान नहीं किया। सिर्फ 25 लाख का भुगतान किया गया है। इसके कारण काम पूरा नहीं हो सका। इनका कहना है कि जिले के 1375 मजरों में काम पूरा हो चुका है। इसके बाद भी बिजली विभाग भुगतान नहीं कर सका। वहीं अधीक्षण अभियंता सुशील कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि यह बात सही है कि कार्यदाई संस्था पूरा बजट खर्च नहीं कर सकी। जिन गांवों में कार्य पूरा होने की रिपोर्ट आई है वहां जांच कराई जाएगी। तीन स्तर पर जांच होना है। जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा।