इस बार विशेष खगोलीय फाल्गुन पूर्णिमा, भद्रा काल और चंद्रग्रहण एक साथ पड़ने से होलिका दहन और रंगों की होली को लेकर संशय बना हुआ है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस साल होली के मौके पर चंद्रग्रहण पड़ रहा है। इसलिए होलिका दो मार्च को जलाई जाएगी, जबकि तीन मार्च को चंद्रग्रहण और शाम पांच बजकर सात मिनट तक पूर्णिमा रहने की वजह से फाग नहीं खेला जाएगा। सूतक की वजह से रंग एक दिन बाद चार मार्च को खेला जाएगा।
हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा दो मार्च की शाम 5:55 बजे से प्रारंभ हो रही है और इसका समापन तीन मार्च को शाम 5:07 बजे होगा। लेकिन पूर्णिमा लगते ही भद्रा का प्रवेश होने से होलिका दहन के मुहूर्त में बदलाव रहेगा। शास्त्रों में भद्रा के मुख काल में होलिका दहन वर्जित बताया गया है जबकि पुच्छ काल को अशुभ नहीं माना गया है।
ऐसे में दो मार्च की अर्धरात्रि के बाद 12:50 बजे से 02:02 बजे (3 मार्च की सुबह) के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ समय रहेगा। शास्त्री ने बताया तीन मार्च 2026 को चंद्रग्रहण भी लगेगा, जो भारत के पूर्वी क्षेत्रों और काशी में खंडग्रास रूप में दिखाई देगा।