स्वास्थ्य विभाग में ठेकेदारों ने बोलेरो व टवेरा आदि 26 चार पहिया गाड़ियां लगा रखी हैं। ये गाड़ियां अस्पतालों में नहीं रहती हैं। इसके बावजूद हर महीने टैक्सी भाड़ा के नाम पर मोटी रकम का भुगतान किया जाता है। इसकी शिकायत होने पर सीडीओ ने स्वास्थ्य विभाग में लगी 26 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नंबर भेजकर ब्यौरा मांगा था। इनमें से यात्री कर अधिकारी ने चार गाड़ियों का ही ब्यौरा भेजा है, बाकी 22 गाड़ियों का ब्यौरा भेजने में वह टालमटोल कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने के लिए लगभग सभी पीएचसी व सीएचसी में दो-दो चार पहिया वाहन लगा रखे हैं। डॉक्टरों को भ्रमण व अभियान को सफल बनाने के लिए यह वाहन दिए गए हैं। जिले में कुल 26 वाहन किराए पर लिए गए हैं। अधिकांश पीएचसी में जो वाहन लगाए गए हैं, वह जाते ही नहीं। सभी डॉक्टर अपने निजी साधन से ही आते-जाते हैं। ठेकेदार कागजों पर खेल कर वाहनों का संचालन कर रहे थे। बाबू भी लगातार ठेकेदारों को रुपये का भुगतान कर रहे थे।
इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई। सीडीओ डा. दिनेश कुमार सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए सभी वाहनों का रजिस्ट्रेशन नंबर भेजकर एआरटीओ से ब्यौरा मांगा। सीडीओ ने एआरटीओ से पूछा था कि ये 26 वाहनों के मालिक कौन हैं, इसके अलावा वाहनों का नाम क्या है, साथ इनका टैक्सी परमिट है या नहीं। 26 वाहनों में से यात्री कर अधिकारी आनन्द राज कुरील ने केवल 4 गाड़ियों का ही ब्यौरा भेजा है। बाकी 22 वाहनों की कोई जानकारी नहीं दी गई। इस पर सीडीओ ने नाराजगी भी जताई है। साथ ही एआरटीओ को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द जानकारी दें।