कौशाम्बी के गांवों में कुपोषित बच्चों की तादात दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अफसरों ने चिह्नित गांवों को गोद लिया। फिर भी कुपोषण मिट नहीं रहा है। सीएमओ के गोद लिए कौशाम्बी ब्लॉक के रसूलपुर सोनी गांव में 50 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। बच्चों के स्वास्थ्य की सच्चाई मंगलवार को गांव में लगे स्वास्थ्य शिविर में सामने आई। यहां करीब 300 बच्चों की सेहत जांचने पर 50 बच्चे कुपोषित मिले। इन कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए उन्हें आयरन, मल्टी विटामिन्स के सीरप, दवाएं दी गईं। साथ ही इनकी सेहत की निगरानी को टीम भी गठित की गई, जो सप्ताह में एक बार इनकी जांच करेगी।
बच्चों के स्वास्थ्य पर काम करने वाली एक सामाजिक संस्था ने करीब दो साल पहले कौशाम्बी के मंझनपुर, सरसवां, कौशाम्बी ब्लॉक के 40 गांवों के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया था। परीक्षण की रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। सामने आया था कि इन गांवों में हजारों बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। उसके बाद जिला अस्पताल में यूनिट की स्थापना की गई। अधिकारियों ने चिह्नित गांवों को गोद लेकर कुपोषण मुक्त बनाने का संकल्प लिया। पर, अब तक गांवों से कुपोषण की समस्या दूर नहीं की जा सकी है। इसका सच मंगलवार को कौशाम्बी ब्लॉक के रसूलपुर सोनी गांव में दिखा। इस गांव को सीएमओ ने गोद लिया है। मंगलवार को यहां लगे स्वास्थ्य शिविर में 5 साल तक के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई। सीएचसी अधीक्षक डॉ.आशीष गुप्ता ने बताया कि जांच में अंकिता, सपना, शिवानी, मोहिनी, पंकज, जीतेंद्र, फूलचंद्र समेत 50 से ज्यादा बच्चे कुपोषित मिले हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक 4 साल की अंकिता का वजन महज 11 किलोग्राम है, जबकि उसका वजन 16 किग्रा होना चाहिए। इसी तरह से सपना का वजन 4 किग्रा कम था, तो शिवानी का वजन 6 किग्रा कम मिला। इन कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने उन्हें पेट के कीड़े मारने वाली दवा के साथ ही मल्टी विटामिन्स, आयरन आदि सीरप पीने को दिया है।