विकास खंड कौशाम्बी के पाली उपरहार में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। गांव में लगे 36 हैंडपंपों में से 28 ने पानी उगलना बंद कर दिया है। ग्रामीणों को प्यास बुझाने के लिए यमुना का पानी पीना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान ने हैंडपंपों का रिबोर कराने के लिए तीन बार बीडीओ से शिकायत की लेकिन एक भी हैंडपंप का रिबोर नहीं हो सका।
पाली उपरहार गांव की आबादी तीन हजार से अधिक है। तराई में बसे गांव के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 36 हैंडपंप लगवाए गए हैं। पिछले साल सूखा पड़ने के कारण यमुना का जल स्तर नीचे खिसक गया है। इससे गांव में सौ फीट बोरिंग पर लगाए हैंडपंपों ने भी पानी देना बंद कर दिया है। गांव के मुन्ना सिंह, बेनीशरण मिश्र, कैरू निषाद, गुरुशरण अग्रहरी, अशोक जायसवाल का कहना है कि यह समस्या मार्च के महीने में ही उत्पन्न हो गई थी।
हैंडपंपों के ठप होने के बाद से 70 फीसदी ग्रामीण यमुना में नहाने और उसी पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों की समस्या को देख ग्राम प्रधान मो. जाकिर ने खराब हैंडपंपों की सूची बनाकर रिबोर कराने की मांग बीडीओ कौशाम्बी से कई बार किया लेकिन बीडीओ ने धनाभाव की बात कहकर समस्या से मुंह मोड़ लिया। ऐसे में ग्रामीणों को यमुना से पेयजल जुटाने के लिए रोज घंटाें पसीना बहाना पड़ रहा है।
पाली उपरहार गांव की 70 फीसदी आबादी यमुना के जल से प्यास बुझा रही है। सुबह होते ही गांव के सामने स्थित यमुना घाट पर ग्रामीण घरों का बर्तन और कपड़ा लेकर पहुंच जाते हैं। लोग यमुना के पानी में स्नान करने के बाद हाथ में दो बर्तन टांगकर घर के लिए पानी लेकर लौटते हैं। पेयजल के रूप में प्रयोग किए जा रहे यमुना के प्रदूषित पानी से गांव के लोग गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि मौजूदा समय में यमुना का पानी पीने योग्य नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों में जल जनित बीमारी का प्रकोप कभी भी हो सकता है लेकिन मजबूर ग्रामीणों के सामने कोई और चारा भी नजर नहीं आ रहा है।