केले का चिप्स तैयार करती महिलाएं। स्रोत- संगठन
हाथ के हुनर ने किरन को अब अचार वाली दीदी बना दिया है। इनका बनाया अचार सरसवां ही नहीं मंझनपुर व सिराथू के लोग भी पंसद कर रहे हैं। इसके अलावा इनके हाथ के मोतीचूर के लड्डू भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। किरन पति के सहयोग से अचार को बाजार पहुंचाकर हर सीजन में 12 से 15 हजार रुपये और अन्य मौसम में सात से आठ हजार की कमाई करती हैं।
सरसवां निवासी किरन शुक्ला ने करीब चार साल पहले स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। अपने साथ ही उन्होंने नौ अन्य महिलाओं को जोड़ा और अचार, केला चिप्स व लड्डू बनाने का काम शुरू कर दिया। करीब चार साल के बाद इनका काम रफ्तार पकड़ चुका है। किरन की मानें तो वह पूरे माह परिवार व समूह की महिलाओं के साथ मिलकर अचार बनाने का काम करती हैं। इसके साथ ही उनके समूह की महिलाओं के हाथ के बने लड्डू भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। मोतीचूर के लड्डू सबसे अधिक बुजुर्ग व बच्चे पसंद करते हैं।
12 से 15 हजार की होती है आय
किरन को अचार, केला चिप्स व लड्डू बनाने से प्रतिमाह 12-15 हजार रुपये का लाभ होता है। किरन ने बताया कि बरसात के दिनों में काम सबसे कम होता है। इसके बाद भी हर माह सात से आठ हजार रुपये की सामग्री बिक जाती है। इससे परिवार के खर्च चलाने में मदद मिलती है। किरन समूह से जुड़ी महिलाओं को उनके काम के अनुसार भुगतान भी करती हैं।
मिलता है ऑर्डर
किरन ने बताया कि उनके अचार को लोग पसंद करते हैं। इसके लिए अलग-अलग मौसम में लोग अचार बनाने का ऑर्डर भी देते हैं। उन्होंने बताा कि इस साल आम के मौसम में करीब दो क्विंटल आम के अचार का ऑर्डर मिला था। इसको तैयार करने में करीब 20 हजार रुपये का लाभ हुआ। उन्होंने बताया कि सरसवां, मंझनपुर और सिराथू ब्लॉक में उनकी अचार की खूब मांग है।