ओडीएफ यानि खुले में शौच मुक्त गांव बनाने के लिए वहां रहने वाले सरकारी कर्मचारियों की मदद ली जाएगी। गांवों में सरकारी कर्मचारियों को शौचालय बनवाने की पहल करनी होगी। साथ ही दूसरे लोगों को भी जागरूक करना होगा। अगर सरकारी कर्मचारियों ने ऐसा नहीं किया तो उन्हें विभागीय कार्रवाई का सामना करना होगा।
राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान के तहत जिले की सभी गांवों को दो अक्तूबर तक पूरी तरह ओडीएफ यानि खुले में शौच मुक्त घोषित किया जाना है। जिसके तहत जिले भर में 180 सदस्यों की टीम उतारी गई है। इतनी बड़ी टीम नाकाफी है। ऐसे में अभियान को सफल बनाने के लिए गांवों में रहने वाले सरकारी कर्मचारियों की भी मदद ली जाएगी। गांवों में शासकीय कार्यों से जुड़े तमाम कर्मचारी रहते हैं। इनमें शिक्षक, लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिव, नलकूप चालक, शिक्षामित्र, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, एएनएम, आशा बहू, रोजगार सेवक, कोटेदार, चौकीदार आदि शामिल हैं।
इन कर्मचारियों को अपने निवास वाले गांव में ओडीएफ का प्रचार-प्रसार करना होगा। सीएलटीएस कार्यक्रम में इन कर्मचारियों को बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना होगा। इन्हें पहल करते हुए खुद परिवार के लिए शौचालय बनवाना होगा साथ ही गांव में अन्य परिवारों को शौचालय बनवाने के लिए जागरूक करना होगा। यदि कर्मचारियों ने विशेष सहयोग नहीं किया और जांच में इसका खुलासा हुआ तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
मढ़ी गांव में निकाली गई रैली
कौशाम्बी ब्लॉक के मढ़ी गांव में शनिवार को स्वच्छता अभियान के तहत ओडीएफ को लेकर रैली निकाली गई। ग्राम प्रधान अशोक मिश्रा और जिला कोआर्डिनेटर जितेंद्र कुमार मिश्रा की अगुवाई में स्कूल के बच्चे और गांव के लोग रैली में शामिल हुए। गांव वालों को स्वच्छता अभियान को लेकर ओडीएफ के बारे में बताया गया। सभी लोगों को अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए संकल्प दिलाया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों ने जागरूकता को लेकर नारे लगाए। रैली में प्रधानाध्यापक मनीष कुमार, सहायक अध्यापक अनिल कुमार, तपोनाथ त्रिपाठी, बुल्ला सिंह, कमलेश कुमार, सुनील कुमार, महेंद्र कुमार, राजाराम आदि शामिल रहे।