मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा बेहतर करने की पहल सुस्त पड़ गई है। योजना से निजी बस संचालकों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च थी, इसके बावजूद एक भी संचालक ने आवेदन नहीं किया।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में करीब 49 निजी बसों का संचालन होता है। इसके बावजूद योजना में भागीदारी न होना विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। योजना के तहत जिले के आठों ब्लॉकों में कम से कम एक-एक बस संचालित करने का लक्ष्य रखा गया था, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बेहतर हो सके और लोगों को आवागमन में सहूलियत मिल सके।
डिपो इंचार्ज गंगा शंकर शर्मा ने बताया कि योजना के बारे में संचालकों को जानकारी दी गई थी, लेकिन फिर भी आवेदन नहीं आए। अब विभाग स्तर पर दोबारा संचालकों से संपर्क कर उन्हें योजना से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि योजना लागू होती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा मजबूत होगी और लोगों को सस्ती व बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
बोले बस संचालक :
बस अनुबंधित होने के बाद डीजल, चालक-परिचालक के मानदेय समेत अन्य खर्चों की तुलना में किराये से उतनी आमदनी होना मुश्किल है। ऊपर से इंश्योरेंस और रखरखाव का खर्च अलग से पड़ता है, जिससे घाटे की स्थिति बनती है। - आशुतोष शुक्ला।
योजना के तहत बस अधिकतम आठ वर्ष पुरानी होनी चाहिए और केवल 10 वर्ष तक ही डीजल बसों का संचालन संभव है। ऐसे में नई बस खरीदकर लोन की किस्त चुकाना संचालकों के लिए कठिन हो जाएगा। - मनीष पांडेय