बेटियों को मिलें बराबर अवसर
स्वरांजलि के पिता संतोष कुमार सरकारी शिक्षक हैं। उन्होंने गणित और भौतिक विज्ञान में मदद की। मां अमिता अग्रहरि ने घर के कामों से दूर रखकर पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। स्वरांजलि का मानना है कि बेटियों को भी लड़कों की तरह शिक्षा और करियर के बराबर अवसर मिलने चाहिए।
जिले में अस्पताल खोलने का सपना
स्वरांजलि आगे चलकर सर्जन बनना चाहती हैं। जाह्नवी का सपना अपने जिले में ऐसा अस्पताल खोलने का है, जहां कम कीमत पर इलाज मिल सके। दोनों बहनों का संदेश है कि बेटियों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना चाहिए। जाह्नवी कहती हैं, “लड़कियों, तुमको झुकना नहीं है, बस आगे बढ़ना है। एक बार करके दिखा दो, लोग भी सहयोग करने लगेंगे।”