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Kaushambi News: सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के बजाय चिकित्सक से कराएं इलाज

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बारिश में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई हैं। रोजाना सांप के काटने से एक-दो मौतें हो रही हैं। इसे देखते हुए जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण ने होने वाले नुकसान और बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। प्राधिकरण के मुताबिक देश में विषैले सर्प मात्र 15 प्रतिशत ही हैं। सर्प दंश के बाद होने वाली मौतों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। इसका प्रमुख कारण लोगों में जागरूकता का अभाव है। क्योंकि,सर्पदंश की घटना के बाद लोग समय से इलाज कराने के बजाय झाड़-फूक आदि पर ज्यादा विश्वास करते हैं।
सर्प के काटने पर क्या करेंः
-काटे गए जगह को साबुन व पानी से धोएं।
-देखें जहरीले सर्प के काटने का दो दंत का निशान तो नहीं।
-काटे हुए अंग को हृदय के लेवल से नीचे रखें।
-सर्पदंश वाले अंग को फिक्स करें।
-घाव और उसके ऊपर बैंडेज लगाएं।
-अस्पताल ले जाकर तुरंत इलाज कराएं।

क्या न करें-
-बर्फ अथवा अन्य गर्म पदार्थ का इस्तेमाल काटे गए स्थान पर न करें।
-सर्प से प्रभावित व्यक्ति के कटे स्थान पर टुर्निकेट न बांधें।
-इससे संबंधित अंग में रक्त प्रवाह पूरी तरह रुक सकता है एवं उस अंग की क्षति हो सकती है।
-काटे गए स्थल पर चीरा न लगाएं। यह आगे नुकसान पहुंचाता है।
-घायल को चलने न दें, शराब/नींद आने की कोई दवा नहीं दें।
-मंत्र या तांत्रिक के झांसे में न आएं।

जहरीले सर्प के काटने पर लक्षण
काटे गए जगह पर दर्द, नींद आना, सांस लेने में परेशानी, बंद होती पलकें, नेक्रोसिस (शरीर के कोषिकाओं की मृत्यु),पक्षाघात,मुंह पर झाग का आना,
निगलने में परेशानी, जी मिचलाना, पेट में अत्यधिक दर्द आदि।
सांप को दूर रखने के तरीके
-सांप के बिल में कार्बोलिक एसिड डाल दें, उसके गंध से सांप दूर हो जाते है।
-मुर्गी के चूजे और चूहे को घरों से दूर रखें।
-सर्पदंश के बारे में जानकारी ही बचाव है।
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