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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए गंगा एक्शन प्लान के शौचालय

Fri, 08 Jul 2016 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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गंगा की तराई में बसे गांवों को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए शौचायल बनाने को भेजी गई रकम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। गांवों में बनवाए गए शौचालयों में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया। संबंधित ग्राम प्रधानों ने इसका विरोध भी किया पर ठेकेदार ने मनमानी बंद नहीं की। इससे नाराज लाभार्थियों ने शौचालयों का प्रयोग शुरू नहीं किया। ऐसे में गंगा एक्शन प्लान परवान चढ़ने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। जिम्मेदार हैं कि वह मामले में पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।
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दो अक्टूबर 2014 को केंद्र सरकार के निर्देश पर जिले में गंगा की तराई में बसी 33 ग्राम सभाओं का चयन गंगा एक्शन प्लान के तहत किया गया। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन ग्राम सभाओं को तत्कालीन डीपीआरओ आरके भारती ने दस हजार 163 शौचालयों का तोहफा दिया था। माना जा रहा था कि इन ग्राम सभाओं में घर-घर शौचालय बनवाए जाने के बाद अपशिष्ट गंगा में न जाकर शौचालयों में जाएगा। इससे गंगा को साफ सुथरा बनाए रखने में सफलता मिलेगी लेकिन शासन की योजना फलीभूत होने से पहले ही बिखर गई। शौचालयों की रकम जैसे ही ग्राम सभाओं में पहुंची तो उस पर ब्लॉक के जिम्मेदारों की गिद्ध दृष्टि लग गई।

उन्होंने ग्राम प्रधान और लाभार्थियों को दरकिनार कर शौचालयों का निर्माण ठेकेदारी प्रथा से करा दिया। एक शौचालय के लिए 12 हजार रुपये दिए गए। पर लाभार्थियों की माने तो उनके घरों में बनवाए गए शौचालय महज पांच से छह हजार रुपये कीमत के हैं। बाकी की रकम ठेकेदार और ब्लॉक के एडीओ पंचायत ने डकार लिया। कराए जा रहे घटिया निर्माण का लाभार्थियों ने विरोध किया। मामले की शिकायत ब्लॉक और जिले के जिम्मेदारों तक से की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज ग्रामीण अब शौचालय बनने के बाद भी उसे प्रयोग में नहीं ला रहे हैं। बानगी के तौर पर विकास खंड मूरतगंज के नरवरपट्टी गांव को लिया जा सकता है।
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यहां के शौचालय लाभार्थी कामता प्रसाद, मुन्नी लाल, सोनेलाल, भगत, लालसिंह आदि का कहना है कि ठेकेदार ने घटिया सामग्री का प्रयोग कर निर्माण कराया है। इसके चलते वह शौचालयों का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि गंगा एक्शन प्लान के तहत ग्राम सभाओं में बनवाए गए शौचालयों से गंगा को साफ सुथरा बनाने में कितनी मदद मिल रही है। यही हाल रहा तो गंगा तो क्या ग्राम सभाओं को भी साफ सुथरा बनाए रखना मुश्किल होगा।

एडीओ पंचायत के बेटे ने ले रखा था ठेका
 विकास खंड मूरतगंज के नरवरपट्टी समेत कई गांवों में शौचालय निर्माण का ठेका एडीओ पंचायत मूरतगंज ने अपने बेटे को दे रखा था। बाप अधिकारी और ठेकेदार बेटे की जुगलबंदी के चलते गंगा एक्शन प्लान के शौचालय निर्माण के दौरान भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए। लाभार्थियों की माने तो एक भी शौचालय ऐसा नहीं है जिसमें घटिया ईंट का प्रयोग न किया गया हो। इतना ही नहीं महज एक बोरी सीमेंट से एक शौचालय का टैंक और दीवार बनवा दी गई। विरोध के बाद भी जब ठेकेदार की मनमानी बंद नहीं हुई तो ग्रामीणों ने प्रयोग करने से ही साफ इनकार कर दिया।

नरवर पट्टी गांव में गंगा एक्शन प्लान के तहत घर-घर शौचालय बनवाए जाने हैं। पहली मर्तबा सौ से अधिक शौचालय ग्राम सभा को मिले। इसका निर्माण मार्च माह में एडीओ पंचायत ने अपने बेटे को ठेका देकर कराया। निर्माण में प्रयोग की जा रही घटिया ईंट और सामग्री का विरोध ब्लॉक के अधिकारियों से किया गया था। पर ठेकेदार की मनमानी नहीं रुकी। इससे नाराज ग्रामीण एक भी शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहे हैं।
रोशनलाल, ग्राम प्रधान नरवरपट्टी

शौचालयों का निर्माण लाभार्थियों को स्वयं कराने की प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि लाभार्थी निर्माण कराने से इनकार कर दें तो ग्राम प्रधान को स्वयं निर्माण कराना चाहिए। यदि ग्राम प्रधान भी आगे न आएं तो किसी कार्यदाई संस्था से निर्माण कराने का प्राविधान है। नरवरपट्टी में शौचालय निर्माण लाभार्थी और प्रधान को दरकिनार कर कराया गया इसकी जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराकर संबंधित के खिलाफ उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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