धीरे-धीरे बढ़ रही सर्दी के साथ जिले की गलियों में देशी स्वाद की महक लौट रही है। जिला मुख्यालय से लेकर नगरों की गलियों, चौराहों और बाजार तक में गजक, रेवड़ी, गुड़हा सेव, मूंगफली और तिल के लड्डू की दुकानें सजी हुई हैं। इन सब में लोगों की सबसे पहली पसंद गुड़ और मूंगफली की गजक बनी है।
व्यापारी अवधेश केसरवानी का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार व्यवसाय बेहतर रहने की उम्मीद है। ठंड के शुरुआती दिनों से ही बिक्री तेज होने लगी है। आने वाले दिनों में कारोबार अच्छा होने की उम्मीद है।
मूंगफली और तिल के गजक, रेवड़ी, चक्की और शक्कर-पट्टी की किस्मों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। जिला मुख्यालय के चौराहा, बस स्टैंड से लेकर करारी, भरवारी, मूरतगंज, सरायआकिल, आदि कस्बों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के चौराहों तक मूंगफली, रेवड़ी, गजक बेचने वाली छोटी-बड़ी दुकान लगाई गई है।
व्यापारियों के अनुसार यदि यही रफ्तार बनी रही तो यह सीजन उनके लिए अब तक का सबसे बेहतर साबित हो सकता है। पिछले साल अच्छा कारोबार हुआ था। इस बार भी अच्छा होने की उम्मीद है।
दाम प्रति किलो रुपये
गुड़हा सेव 160
गजक 110
तिल लड्डू 240
राम दाना लड्डू 120
मूंगफली चिक्की 150
ड्राई फ्रूट गजक 400
रेवड़ी (सादा या खसखस) 120
सर्दी के मौसम में रेवड़ी, गजक के अलावा गुड़ व तिल से बने पदार्थ सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि शरीर को ऊर्जा देने वाला पारंपरिक आहार भी हैं। गुड़ और तिल का मेल शरीर को गर्म व ताकतवर रखने में मदद करता है। हालांकि, फैटी लीवर और थायराइड वाले व्यक्तियों के लिए गजक और गुड़ के लड्डू उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। -डॉ. सुएब अंसारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करारी