मंझनपुर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जी निकाह किए जाने की जांच शुरू हो गई है। बुधवार को बीडीओ मंझनपुर ने सालेपुर गांव जाकर ग्रामीणों का बयान दर्ज किया था। आरोपी मौके पर नहीं मिले। उनके परिजनों ने तलाक होने की बात कही। हालांकि, इसके कागजात वह नहीं दिखा सके। जिस पर बीडीओ ने जांच पूरी होने तक राशि खाते में भेजे जाने पर रोक लगा दी है।
बता दें कि ओसा स्थित नवीन मंडी में 14 नवंबर को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से शादी की थी। सालेपुर के प्रधान मो इसराइल शाह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर बताया था कि उनके गांव की नेहा और हिना बानो ने योजना का लाभ लेने के लिए फर्जीवाड़ा किया।
इस पर डीएम ने बीडीओ रामजी जायसवाल जांच सौंपी। बीडीओ के मुताबिक ग्रामीणों ने अपने बयान में फर्जी तरीके से विवाह किए जाने की बात स्वीकार की है। आरोपी दोनों जोड़े मौके पर नहीं मिले। उनके परिजनों का कहना था कि तलाक होने की वजह से दूसरा निकाह किया है। परिवार वाले निकाह के साक्ष्य नहीं दिखा सके। बीडीओ ने बताया कि इन दोनों जोड़ों के खाते में जांच पूरी होने से पहले रकम नहीं भेजी जाएगी। विवादित पक्ष से हलफनामे के साथ तलाक का कागज मांगा गया है। आरोप सही साबित हुआ तो विवाह के वक्त दिए गए 11 हजार रुपया कीमत के सामान की रिकवरी कराई जाएगी। साथ ही धोखाधड़ी की प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी।