कसेंदा गांव की अलसमा की मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। विद्यालय में पढ़ने वाली उसकी सहेलियां समा, सुनैना और शारदा ने उसे पढ़ाई में होशियार और स्वभाव से मिलनसार बताया है।
सहेलियों का कहना है कि अलसमा हर समस्या में आगे रहती थी और छोटी- छोटी मदद के लिए भी तैयार रहती थी। अचानक मोबाइल फोन की मांग पर हुई उसकी मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।
अलसमा के पिता चांद बाबू ने बताया कि उन्होंने बच्चों की परवरिश में कमी नहीं रखी। जो भी जरूरी होता था, वह उपलब्ध कराते थे। बेटी की मांग पूरी करने का इरादा भी था और कुछ दिनों में मोबाइल दिलाने का आश्वासन दिया था।
उन्होंने कहा कि बड़े बेटे सद्दाम को पढ़ाया। वह अब अपने दम पर दुकान में काम करता है। बड़ी बहन जोया की शादी में भी किसी प्रकार की कमी नहीं की थी। अलसमा की असमय मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
युवा सोशल मीडिया, मोबाइल फोन या वीडियो गेम के आदी होते जा रहे हैं, उनमें आत्महत्या के विचार, आत्महत्या के प्रयास और भावनात्मक या व्यवहार संबंधी समस्याओं का खतरा ज़्यादा होता है। वह थोड़ी-थो़ड़ी बात पर मरने-मारने को तैयार हो जाते हैं। ऐसे में बच्चों की मानसिकता को समझना जरूरी है। डॉ. अनुराग वर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल।