सीआरपीएफ के शहीद जवान को साथियों ने किया नमन
दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर, अलवारा गांव में किया गया अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
पश्चिमशरीरा। छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में शहीद कामता प्रसाद के शव को शनिवार सुबह मुखाग्नि दी गई। अलवारा गांव के बाहर सीआरपीएफ ने टेंट लगाकर शहीद का शव अंतिम दर्शन के लिए रखवाया था। सीआरपीएफ के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देने के साथ ही शव को कंधा देकर शमशान घाट पहुंचाया।
गुरुवार को छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले के दौरान के महेवाघाट कोतवाली के अलवारा गांव निवासी कामता प्रसाद (28) पुत्र रघू प्रसाद शहीद हो गए थे। शुक्रवार रात करीब एक बजे साथी जवान कुंदन लाल शहीद का पार्थिव शरीर लेकर गांव आए। अलवारा में गांव के बाहर ही सीआरपीएफ के जवानों ने शहीद के अंतिम दर्शन के लिए टेंट लगाया था। शनिवार सुबह सीआरपीएफ लखनऊ के आईजी डॉ. सुभाष चंद्र, डीआईजी मनीष कुमार सच्चर समेत तमाम जवान व अफसर गांव पहुंचे। शहीद को पुष्पांजलि देने के बाद शहीद का शव घर ले जाया गया। इसके बाद गांव के कब्रिस्तान में शव का अंतिम संस्कार किया गया। सीआरपीएफ के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस मौके पर सदर विधायक लाल बहादुर, पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार, बलवीर सिंह चौहान, शिवमूर्ति, कृपाशंकर आदि मौजूद रहे।
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साहब, वंश उजड़ गया अब शहीद की याद में बने उपवन
पश्चिमशरीरा। अलवारा गांव के शहीद कामता प्रसाद के पिता रघू प्रसाद बेटे का शव देख फफक पड़े। सीआरपीएफ के आईजी डॉ. सुभाष चंद्र से रघू प्रसाद ने कहा कि साहब उनका वंश उजड़ गया है। अंतिम इच्छा है कि बेटे की याद में गांव के अंदर शहीद पार्क बनाया जाए। इसके अलावा बीए पास शहीद की विधवा अनीता को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की। इस पर आईजी ने कहा कि सीआरपीएफ आजीवन उनके साथ है। किसी तरह की दिक्कत होने पर वह संपर्क कर सकते हैं। रहा सवाल, बहू की नौकरी का तो उसे जल्द ही नौकरी दिलाई जाएगी। इस पर रघू प्रसाद ने कहा कि नौकरी अगर कौशाम्बी में मिल जाए तो ज्यादा ठीक होगा। इस पर आईजी ने कहा कि यह राज्य सरकार का मामला है। फिलहाल वह इस बारे में प्रयास करेंगे। बताते चले कि रघू प्रसाद का शहीद बेटा कामता एकलौता था। तीन बेटियां है, जिनकी शादी हो चुकी है। परिवार में सिर्फ बहू अनीता ही बची है। कामता के बच्चें नहीं है।
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बेहोश हो गई कामता की मां
पश्चिमशरीरा। बेटे के शहीद होने की जानकारी कामता की मां श्यामकली को पहले नही दी गई थी, लेकिन घर में आने वाले रिश्तेदारों की भीड़ उसे किसी अनहोनी को लेकर परेशान किए थी। श्यामकली खुद बीमार है और बिस्तर पर है। बेटे का अंतिम दर्शन कराने के लिए जब श्यामकली को लाया गया तो वह बेहोश हो गई। रिश्तेदारों ने किसी तरह उन्हें संभाला।
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नहीं थम रहे थे साथी जवान के आंसू
पश्चिमशरीरा। शहीद कामता के साथ कौशाम्बी आए साथी जवान कुंदन लाल के आंसू नहीं थम रहे थे। कुंदन लाल ने बताया कि वह भी कामता के साथ सर्च ऑपरेशन में थे। भोर करीब चार बजे अचानक नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। कामता को गोली लगी तो उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कुंदन के मुताबिक वह कामता के साथ ही खड़ा था। जैसे ही कामता के सिर में गोली लगी तो उसने फौरन उसे संभाला। अफसरों ने तत्काल कामता को अस्पताल पहुंचाने को कहा। कुंदन को मलाल है कि वह अपने साथी को बचा नहीं सका।
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किसानी करके बेटे को फौज में कराया भर्ती
पश्चिमशरीरा। रघू प्रसाद के पास महज ढाई बीघा खेत है। इस पर एकलौते बेटे कामता व तीन बेटियों की परवरिश का जिम्मा उन पर था। अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए उन्होंने तीनों बेटियों की शादी की। कामता प्रसाद की इच्छा फौज में जाने की थी। रघू प्रसाद ने बेटे की इच्छा का मान रखकर उसे फौज में भर्ती होने लायक बनाया। वर्ष 2011 में कामता की शादी अनीता के साथ की गई। इसके ठीक दो साल बाद कामता फौज में शामिल हुआ। रघू के अब अच्छे दिन आ चुके थे। लेकिन नक्सली हमले में बेटे के शहीद हो जाने के बाद वह परेशान दिख रहे हैं।