रोजगार संसाधनों से विहीन दोआबा में विलायती ‘बम्बू’ जल्द ही रोजगार मुहैया कराएगा। जिले के लोगों के लिए यह जीविकोपार्जन का साधन तो बनेगा ही आकर्षक और उपयोगी सामानों का निर्माण भी कराया जाएगा। डीएम अखंड प्रताप सिंह की पहल पर जिले में इसकी शुरुआत हो गई है। पिछले दिनों जिले में आए एक संस्था के जिम्मेदारों ने इसकी खेती के लिए जिले का चयन कर लिया है।
दोआबा में खाली पड़ी जमीनों व खेतों के मेड़ोें पर ‘बम्बू’ अर्थात बांस की खेती की पहल शुरू की गई है। इसके लिए 30 से 40 देशों में 144 प्रकार के बांस उगाकर फर्नीचर समेत विभिन्न उपयोगी सामानों का निर्माण करने वाली संस्था ‘सीवार्ट’ सेंटर फार इंडियन बम्बू रिसोर्स एंड टेकभनालॉजी से संपर्क साधा गया। डीएम की पहल पर पिछले दिनों संस्था के डॉ. आई.बी. रामानुज राव और के. राव ने जिले का दौरा किया। दौरे में उन्होंने निर्धारित किया कि दोआबा में खेतों की मेड़ व खाली पड़ी जमीनों पर सात से आठ प्रकार के ‘बम्बू’ आसानी से उगाए जा सकेंगे। बांस के तैयार होने पर इससे बनने वाले विभिन्न सामानों से जुड़े प्लांट दोआबा में स्थापित कराते हुए काम शुरू करा दिया जाएगा। डीएम ने संस्था द्वारा उपलब्ध कराई गई कुछ प्रजातियों का रोपण भी अलवारा झील में करा दिया है। जल्द ही इसका विस्तार करने के लिए प्रभावी कदम उठाना शुरू कर दिया जाएगा।
किन-किन चीजों का होगा निर्माण
दोआबा में उगाई जाने वाली आठ प्रकार की बम्बू प्रजातियों से मनुष्य की जरूरत से जुड़ी तमाम चीजों का निर्माण होगा। इससे टोकरी, सजावट के फ्रेम, आकर्षक और टिकाऊ फर्नीचर का निर्माण होगा। इस काम के शुरू होने से जिले के लोगों को घर बैठे काम मिलेगा। बांस की एक प्रजाति से प्लांट के जरिए कोयला भी बनेगा। खास बात यह है कि यह कोयला पत्थर के कोयले से अधिक टिकाऊ, ज्वलनशील और सस्ता होगा। जिसका फायदा जिले में ईट भट्ठा संचालकों को भी मिलेगा। वहीं आंधी तूफान में फसलों की रक्षा भी होगी।
सीवार्ट संस्था के सदस्यों ने जिले का भ्रमण कर आठ प्रजातियों को उपयोगी बताया है। इन प्रजातियों के 14500 पौधों का रोपण भी कराया जा चुका है। इसमें सफलता मिलने पर पूरे जिले में बांस का रोपण होगा।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम कौशाम्बी