एक ओर देश में फीफा विश्व कप को लेकर फुटबॉल का उत्साह चरम पर है और लोगों की निगाहें खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर टिकी हैं, वहीं कौशाम्बी में फुटबॉल प्रतिभाओं का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है। जिले में खेल स्टेडियम होने के बावजूद अब तक फुटबॉल कोच की तैनाती नहीं हो सकी है।
इससे फुटबॉल में रुचि रखने वाले युवा उचित प्रशिक्षण न मिलने के कारण अन्य खेलों की ओर रुख कर लेते हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि जिले में प्रशिक्षक की व्यवस्था होती तो यहां से भी अच्छे फुटबॉल खिलाड़ी निकल सकते थे।
बचपन से ही फुटबॉल खेलने का शौक था। नियमित रूप से मैदान में अभ्यास करने जाते थे, लेकिन प्रशिक्षक नहीं होने के कारण खेल की बारीकियां नहीं सीख पाए। कोच की सुविधा मिलती तो वह अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ सकते थे। - पवन, फुटबॉल खिलाड़ी।
जिले में स्टेडियम बनने से उम्मीद जगी थी कि फुटबॉल खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे, लेकिन कोच की नियुक्ति न होने से यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। कई युवा फुटबॉल खेलना चाहते हैं, लेकिन प्रशिक्षण नहीं मिलने से उनका उत्साह कम हो जाता है। - विवेक , फुटबाॅल खिलाड़ी।
मैदान और संसाधनों के बावजूद प्रशिक्षक का अभाव सबसे बड़ी समस्या है। बिना कोच के खेल में आगे बढ़ना मुश्किल होता है। इसी वजह से उन्होंने फुटबॉल खेलना लगभग बंद कर दिया। प्रशिक्षक की तैनाती हो जाए तो कई छिपी प्रतिभाएं सामने आ सकती हैं।- रामू
रामू
रामू