जिले में बोई गई सरसों की फसल पर मौसम की दोहरी मार पड़ती नजर आ रही है। बीते एक महीने से लगातार छाए घने कोहरे और रात में पड़ रहे पाले ने जिले में करीब 4850 हेक्टेयर रकबे में बोई गई सरसों की फसल को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। फसल इस समय फूल और दाना बनने की नाजुक अवस्था में थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
खेतों में सरसों की पत्तियों के झुलसने, फूल झड़ने और फलियों के सूखने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए उन्होंने पारंपरिक उपायों के तहत सिंचाई, खेतों में धुआं करने जैसे प्रयास किए, लेकिन लंबे समय तक बने प्रतिकूल मौसम के सामने ये उपाय भी नाकाफी साबित हुए। किसानों का अनुमान है कि यदि मौसम जल्द अनुकूल नहीं हुआ तो सरसों के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
इस साल करीब एक महीने तक लगातार कोहरा और पाला का असर रहा है। इसकी वजह से सरसों के फूल बहुत खराब हो गए हैं। नीलगायों से फसलों को पहले ही बहुत नुकसान पहुंचा है, मौसम की मार से भी फसल खराब हो चुकी है। - अर्जुन किसान
अच्छा उत्पादन मिलने की उम्मीद लेकर 1450 रुपया प्रति किलो का सरसों बीज खरीद कर बोया गया है। बुवाई के समय बहुत मुश्किल से डीएपी खाद का इंतजाम हुआ। इस साल खेती में लागत बहुत बढ़ चुकी है लेकिन सरसों की खेती के ऊपर मौसम की मार से उत्पादन में कमी आएगी। - रवि शर्मा, किसान
अर्जुन, किसान- फोटो : 1