सिराथू क्षेत्र के कछार में ग्रामीणों की उड़ी नींद, आर्थिक नुकसान की चिंता ने बढ़ाई मुश्किलें
फोटो- 14, 15,17,18
संवाद न्यूज एजेंसी
कल्यानपुर। सिराथू क्षेत्र में गंगा की तराई वाले इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं। बाढ़ से चार गांवों धान, मिर्च, बाजरा और शकरकंद की करीब 850 बीघे फसल बर्बाद हो गई है। कछार में फसलों की सुरक्षा के लिए बनाई गई झोपड़ियां डूब गई हैं। बाढ़ से हुई तबाही की वजह से नदी के किनारे बसे गांवों में लोगों की नींद उड़ गई है। हालात देख तहसील और सिंचाई विभाग के अफसरों ने निगरानी बढ़ा दी है।
बीते दिनों हुई झमाझम बारिश ने गंगा का जलस्तर बढ़ा दिया है। तीन दिन से लगातार पानी बढ़ रहा है। रविवार को ही करीब छह सेंटीमीटर जलस्तर चढ़ गया। नदी में खतरे का निशान 84.734 मीटर पर है। जबकि, इस समय नदी में जलस्तर 81.84 मीटर है। फिर भी बाढ़ की आशंका और फसल चौपट होने से किसान परेशान हैं।
तरसौरा, हिसामपुर परसखी, सुखऊ का पूरा, शाहजापुर के तमाम किसान कछार में धान, बाजरा, मिर्च, तिल्ली, मूंगफली और शकरकंद की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। तरसौरा के मुन्नालाल, हरिओम, इंद्रपाल, जगरूप, सुखऊ का पूरा के कैलाश पटेल, कल्लू पटेल का कहना है कि बाढ़ की चपेट में आकर करीब 850 बीघे फसल जलमग्न हो गई है।
यही नहीं तराई में खेतों की रखवाली के लिए बनाई गईं झोपड़ियां भी पानी में समा गईं। तरसौरा के हरिप्रसाद की भैंस शनिवार की रात उफनाई गंगा नदी में बह गई। ग्रामीणों ने काफी तलाश की, लेकिन भैंस का पता नहीं चला। हालांकि, आबादी से बाढ़ का पानी अभी काफी दूर है। फिर भी बढ़ते जलस्तर ने लोगों का चैन-सुकून छीन लिया है।
शनिवार देर रात सिराथू के नायब तहसीलदार विनय कुमार ने हालात का जायजा लिया। इलाके के लोगों से नदी में नाव से आवागमन न करने की सलाह दी। सिंचाई विभाग के एक्सईएन जगदीश लाल ने भी अपनी टीम के साथ कछारी इलाकों का मुआयना किया।
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बाढ़ से प्रभावित हुए किसान
बाढ़ के कारण तरसौरा के जनार्दन, अंगद, संतोष की पांच-पांच बीघे, पक्कल पटेल की तीन बीघे, रामराज की 10 बीघे, राज किशोर की आठ बीघे, मक्खन लाल पटेल की 12 बीघे, बलभद्र मिश्र की 12 बीघे में बोई गई फसल डूब गई है। वहीं, फूलचंद की छह बीघे, भागवत की पांच बीघे, गया प्रसाद की 20 बीघे, संजय और विनोद की 10-10 बीघे, विद्या प्रसाद पांडेय की छह बीघे, सुखऊ का पूरा के विनय की पांच बीघे, हिसामपुर परसखी की चार बीघे में बोई गई फसल डूब गई है। इसी तरह अन्य किसानों की फसल डूबी है। प्रभावित किसानों का कहना है कि पानी में जितनी फसल डूबी है, अब उसका बचना नामुमकिन है। क्योंकि, पूरी फसल बालू में दब गई होगी।
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गंगा की तराई में अपनी ही छह बीघे खेत में मिर्च, शकरकंद, बाजरा, धान की फसल लगाई थी। पूरी फसल बाढ़ में डूब गई। अब इस फसल से एक दाना भी नहीं मिलेगा।
सुनील कुमार पांडेय, हिसामपुर परसखी
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नदी की बाढ़ में धान, बाजरा व मिर्च की पांच बीघे में बोई गई फसल बह गई है। पानी घट भी जाएगा तो खेत में सिर्फ बालू ही बालू मिलेगी। अनाज तो दूर एक पौधा भी मिलना मुश्किल है।
अंगद प्रसाद, तरसौरा
गंगा में अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ा गया है। बारिश की वजह से ही जलस्तर बढ़ रहा है। उम्मीद है कि अगले 12 से 14 घंटे के अंदर जलस्तर घटने लगेगा।
जगदीशलाल
एक्सईएन, सिंचाई विभाग
बाढ़ में फसल डूबी है, लेकिन आबादी का इलाका पूरी तरह से सुरक्षित है। लेखपालों को नुकसान के आकलन के लिए लगाया गया है। इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
अजेंद्र सिंह
एसडीएम, सिराथू
तरसौरा गांव में किसानो की डूबी झोपड़ी। संवाद
तरसौरा गांव में किसानो की डूबी झोपड़ी। संवाद
तरसौरा गांव में किसानो की डूबी झोपड़ी। संवाद