हादसे के एक दिन पहले आया था 20 पैकेट बारूद
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। विस्फोट कांड का शिकार हुई भरवारी की पटाखा फैक्टरी में कहने के लिए तो कई फायर एक्सटिंग्विशर लगे थे, लेकिन इन्हें चलाने का तरीका वहां श्रमिकों को नहीं आता था। हादसे में बाल-बाल मजदूरों ने इसका खुलासा किया।
चमंधा में रहने वाले फूलचंद्र ने बताया कि करीब डेढ़ साल से वह खल्लाबाद स्थित पटाखा फैक्टरी में काम कर रहे थे। उनके साथ करीब 20 लोग और काम करते थे। घटना के एक दिन पहले करीब 10 बड़े-बड़े पैकेट में बारूद रखा गया था। इससे पटाखे बनाए जाने थे। शायद इसी बारूद की वजह से धमाका भीषण हुआ।
फूलचंद्र ने बताया कि फैक्टरी में आग बुझाने के सारे इंतजाम थे। फायर एक्सटिंग्विशर भी लगे थे। इसका इस्तेमाल कैसे होगा, यह किसी को नहीं मालूम था। कुछ ऐसी ही बात हादसे में जख्मी हुए उसरापर के किशोर मंगलदास ने बताई। कहा कि करीब एक साल से फैक्टरी में काम कर रहा था, लेकिन आग बुझाने का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
श्रमिकों की इन बातों से फायर ब्रिगेड के उन दावों की भी पोल खुल गई, जिसमें आग से बचाव के अभियान चलाने की बात कही जाती है।
पटाखा फैक्टरी में सुरक्षा के सारे मानक पूरे थे। मैं खुद जांच करने गया हूं। सभी जगह आग बुझाने का प्रशिक्षण लोगों को दिया जाता है। यहां भी दिया गया होगा। दूसरी टीम जाती रही है। इसलिए मुझे जानकारी नहीं है।
अशोक यादव, एफएसओ