सिराथू तहसील के कैंमा गांव की मंजू देवी ने संघर्ष, हौसले और मेहनत के दम पर अपनी जिंदगी की तस्वीर बदल दी। कभी ससुरालियों के तानों और आर्थिक तंगी से जूझने वाली मंजू आज न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उन्हें भी रोजगार से जोड़ रही हैं।
सरसों के तेल के कारोबार से मजबूत हुई मंजू अब दूसरों की मदद करने में भी पीछे नहीं हटतीं। उनका कहना है कि जब भी कोई जरूरतमंद उनके पास आता है, वह अपनी क्षमता के अनुसार उसकी सहायता जरूर करती हैं।
मंजू देवी बताती हैं कि जब उन्होंने वर्ष 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर काम शुरू किया था, तब ससुराल के लोग उन्हें ताने देते थे और बाहर जाकर काम करने से मना करते थे। हालांकि, उनके पति शुरू से ही उनके साथ मजबूती से खड़े रहे और हर मुश्किल में उनका साथ दिया।
मंजू अगस्त 2020 का वह दौर याद कर भावुक हो जाती हैं, जब उन्हें महज 10 रुपये में पूरा महीना गुजारना पड़ा था। आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। मंजू की सफलता को देखकर वही ससुराल वाले अब उनकी सराहना करते हैं और हर कदम पर सहयोग भी करते हैं।
मंजू देवी ने बताया कि चार महीने पहले उन्होंने समूह के माध्यम से दोना-पत्तल बनाने की मशीन भी खरीदी है, जिसकी शुरुआत जल्द ही की जाएगी।