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Kaushambi News: धान के ढेर में किसानों के अरमान हो रहे धराशायी

Fri, 31 Oct 2025 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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बूंदाबांदी के बीच धान के ढेर को बोरियों में भर हटाती महिला किसान। संवाद
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क्षेत्र में बृहस्पतिवार सुबह से हो रही बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता को दोगुना कर दिया है। हार्वेस्टर मशीन से कटे धान के ढेर घरों के सामने खुले में पड़े हैं लेकिन क्रय केंद्र अभी तक नहीं खुले हैं। इससे धान भीगकर खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। किसान बारिश से बचाव के लिए पॉलिथीन और तिरपाल से ढेरों को ढकने को मजबूर हैं।
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किसान गुलाब सिंह, प्रेमबहादुर, भान सिंह और सुरेंद्र कुमार ने बताया कि हार्वेस्टर से कटाई वाले धान में नमी की मात्रा ज्यादा होती है। इसे कम से कम तीन दिन धूप में सुखाना जरूरी है। राजेश वर्मा के मुताबिक, तिरपाल से ढकने के बावजूद धान के ढेर में नमी जमीन से पहुंच रही है इससे फफूंदी लगने का डर है। धान काला पड़कर बेकार हो जाएगा।
लालती देवी और मुन्नी देवी का खुले में रखा अनाज बारिश की मार झेल रहा है। क्रय केंद्रों के बंद रहने से कोई खरीदार भी नहीं आ रहा। उनका कहना है कि क्रय केंद्र के खुलते ही धान बेचने के लिए टोकन नंबर लेना पड़ता है। 10 से 20 दिन बाद नंबर आता है।
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ऐसे में फसल बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है। इलाके में सैकड़ों किसान इसी समस्या से जूझ रहे हैं। फिलहाल मौसम विभाग ने अगले दो दिन और बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे में धान की कटाई भी रुक गई है।
रुक गई आलू की बोआई
अक्तूबर माह का दूसरा पखवाड़ा आलू की बोआई का पीक समय होता है। पिछले चार दिन से मौसम के मिजाज से आलू की बोआई पिछड़ रही है। अधिक बारिश होने पर बोआई के लिए 15 दिन और इंतजार करना पड़ सकता है।
- खराब मौसम में धान के ढेर को जूट की बोरियों में भर छायादार स्थान पर छल्ली लगा कर रख दें। जूट की बोरी के छिद्रों में से हवा लगने पर उपज खराब होने की संभावना कम हो जाती है। - मनोज कुमार सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र

बूंदाबांदी के बीच धान के ढेर को बोरियों में भर हटाती महिला किसान। संवाद

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