खरीफ फसल की बुआई के मानसून के बेरुखी से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश न होने से खरीफ की फसल मुरझाने लगी है इससे किसान निराश हैं। पखवाड़े भर से बारिश नहीं होने से कुछ किसानों ने निजी नलकूपों से धान की सिंचाई शुरू कर दी है लेकिन बारिश नहीं हुई तो फसल का बच पाना मुश्किल है।
चायल तहसील के सरायअकिल, पुरखास, नेवादा, तिलहापुरमोड़, कसेंदा, मनौरी और मूरतगंज क्षेत्र में पखवाड़े भर से अब तक ठीक तरह से बारिश नही हुई है। ऐसे में किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि कम बारिश होने पर फसल को मुरझाने से कैसे बचाएं। किसान लल्लू सिंह, कमलेश, जगतपाल और कलीमुद्दीन ने बताया कि हल्की बूंदाबांदी के बाद अरहर, ज्वार, बाजरा और तिल की फसल की बुआई की थी लेकिन तेज धूप से मिट्टी में नमी खत्म हो रही है।
किसान प्रेम बहादुर सिंह, जानकी दास और मैकू कुशवाहा ने अपने खेतों में नलकूप से धान की सिंचाई तो कर दी है लेकिन बारिश न होने से दिनों दिन उनकी चिंताएं बढ़ने लगी है। उनका कहना है बिजली कटौती से नलकूप के भरोसे धान का उत्पादन नहीं लिया जा सकता है। फसलों को बारिश के पानी की आवश्यकता है। किसान किसी तरह फसलों को सूखने से बचाने में लगे है।
बरसात न होने से रात में फसल सिंचाई करना पड़ रहा है। क्षेत्र में निकली नहरों में भी पानी नहीं है। बरसात न होने से सूखे की आशंका बढ़ गई है।
बोले किसान
धान की सिंचाई नलकूप से शुरू की गई है लेकिन बिजली कटौती से रतजगा करना पड़ता है। रात में सांप-बिच्छू का भी डर बना रहता है।
- रिंकू सिंह, किसान
बारिश नहीं होने से धान, अरहर, ज्वार, बाजरा, और तिल की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बिना बारिश के इनका उत्पादन मुश्किल है।
- संतोष मिश्रा, किसान
बारिश न होने से मुरझा रही मिर्च की फसल। संवाद
बारिश न होने से मुरझा रही मिर्च की फसल। संवाद