सैनी कोतवाली के डेलसेहिया गांव में मंगलवार को एक किसान ने घर के अंदर फांसी लगाकर खुदकुशी कर लिया। पिछले दो साल से वह कैंसर पीड़ित था। आत्मघाती कदम उठाने के पीछे बीमारी के साथ ही परिजन बकाए विद्युत बिल की आरसी जारी होना बता रहे हैं। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। घटना के बाद से पीड़ित परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
डेलसेहिया निवासी हरन पटेल (40) पुत्र रामआसरे किसानी करके परिवार का गुजारा करता था। पिछले दो साल से उसके गले में कैंसर हो गया था। परिजन उसका इलाज भी करा रहे थे। बीमारी के साथ-साथ इधर कुछ दिनों से वह बकाया बिजली के बिल की आरसी जारी होने से परेशान रहता था। मंगलवार की दोपहर पत्नी बच्चे बस्ती से बाहर खेतों की तरफ चले गए थे। तभी उसने अपनी शर्ट से फांसी लगाकर खुदकुशी कर लिया। मृतक के बड़े भाई नंदलाल ने बताया कि कुछ देर बाद घर आए बच्चों के दरवाजा खटखटाने पर कोई आवाज नहीं आई तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। इस पर बेटे राजगुलाब ने छत काट डाली। कोठे के अंदर धन्नी के सहारे फंदे से लटकती पिता की लाश देख उसकी चीखें निकल गई। रोने-बिलखने की आवाज सुन परिजन और पड़ोसी इकट्ठा हो गए। सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने मौका मुआयना करने के बाद लाश फंदे से उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कोतवाल एपी तिवारी का कहना है कि हरन ने बीमारी से तंग आकर खुदकुशी किया है। परिजनों ने पुलिस को लिखकर यही तहरीर दिया है। बिजली विभाग की आरसी के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
संग्रह अमीन की धमकी से सहमा था हरन
डेलसेहिया निवासी हरन पटेल के पास दो बीघे खेत और नलकूप है। वह अपने तीन बेटे और दो बेटी समेत पांच बच्चाें और पत्नी की परवरिश खेती-किसानी से ही करता था। दो साल पहले कैंसर होन की वजह से वह दवा-इलाज में परेशान हो गया। इससे खेती-किसानी भी प्रभावित होने लगी। इसी बीच तकरीबन चार लाख रुपये से अधिक का विद्युत बकाया होने के कारण उसके पिता रामआसरे के नाम आरसी जारी हो गई थी। किसी तरह से हरन ने दिसंबर 2018 में खेत गिरवी रखकर 20 हजार रुपये जमा कर वक्ती तौर पर जान बचा लिया था। लेकिन बड़े भाई नंदलाल का कहना है कि संग्रह अमीन ने उसे जल्द बकाया रकम नहीं जमा करने पर हवालात में डालने की चेतावनी भी दिया था। इससे वह परेशान रहता था। इधर बीच मुबई में रहकर प्राइवेट नौकरी करने वाला बड़ा बेटा राज गुलाब भी घर आ गया था। बताते हैं कि हरन रोजाना उससे कहता था कि जाओ कमाकर रुपये भेजो। ताकि बिजली का बकाया जमा किया जा सके। परिजनों का कहना है कि उसे हर वक्त अपनी बीमारी से ज्यादा बिजली के बकाए बिल की चिंता सता रही थी। दोहरे तनाव के कारण मंगलवार की दोपहर उसने घर के अंदर फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली।