मंझनपुर। आई फ्लू से परेशान मरीजों के लिए अब एक नई समस्या खड़ी हो गई है। आईफ्लू के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली अच्छी कंपनियों की आई ड्राॅप बाजार से गायब हो गई है। विकल्प के तौर पर मेडिकल स्टोर संचालक दूसरी आई ड्राॅप दे रहे हैं। इससे मर्ज ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा है।
माहभर से आईफ्लू ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक में फैला हुआ है। स्कूल के बच्चों से लेकर बड़े तक इसकी चपेट में हैं। आईफ्लू फैलने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जिला अस्पताल की ओपीडी में ही औसतन हर रोज एक सैकड़ा मरीज आईफ्लू के ही पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को आम तौर पर अस्पताल परिसर से ही दवा उपलब्ध करा दी जाती है।
अस्पताल में मरीजों को आईड्राप के साथ कुछ खाने की दवा भी उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं तमाम मरीज डॉक्टर से बाहर की आई ड्रॉप लिखने का अनुरोध करते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मरीज निजी चिकित्सकों के पास भी पहुंचते हैं। जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. हेमंत यादव बताते हैं कि आमतौर पर आईफ्लू के उपचार में मोसीडी, सीफ़्लाक्स डी, डेक्सिन और महाफ्लाक्स डी आई ड्राॅप कारगर होती है।
अधिकांश चिकित्सकों की ओर से यही चार आई ड्राॅप के इस्तेमाल का सुझाव दिए जाने के कारण इनकी खपत बढ़ गई है। शायद यही वजह है कि बाजार में ये आई ड्राॅप नहीं मिल रहे हैं। चिकित्सक का कहना है कि नामचीन कंपनियों के अलावा दूसरे आई ड्राॅप भी आईफ्लू में कारगर हैं। बस, थोड़ा वक्त ज्यादा लगता है।
आंख से आंख न मिलाएं
सीएमएस डॉ. एसके शुक्ल बताते हैं कि अमूमन आईफ्लू तीन से पांच दिन में ठीक हो जाता है। घबराने की जरूरत नहीं है। सावधानी बरतना जरूरी है। अगर किसी को आईफ्लू हो, तो उससे सीधे आंख न मिलाएं। आईफ्लू से पीड़ितों को जागरूकता दिखाते हुए घर पर ही रुकना चाहिए।
माह भर से आईफ्लू ज्यादा फैला है। खपत बढ़ने से नामचीन कंपनियों के आई ड्रॉप की कमी हो गई है। दवा बनाने वाली कंपनी ही एजेंसियों को माल नहीं भेज पा रही हैं। इसके कारण दिक्कत आ रही है।
-घनश्याम अग्रहरि, मेडिकल स्टोर संचालक
आई फ्लू का संक्रमण अधिक होने के कारण आईड्राप की मांग बढ़ी है। कुछ नामचीन कंपनियों के आई ड्राप की बाजार में कमी है। निर्माता ही दवा उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
-अशोक केसरवानी,केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव