निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मियों की हड़ताल लगातार दूसरे दिन जारी रही। मंगलवार को आंदोलित कर्मचारियों ने कोरोना को देखते हुए सिर्फ जिला अस्पताल की आपूर्ति बहाल रखने का फैसला लिया। इसके अलावा जिले में विद्युत सप्लाई बाधित रखने की रणनीति तैयार की गई। इस बीच प्रशासन की भूमिका उपकेंद्रों की पहरेदारी तक सीमित दिखी।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वाधान में आयोजित विरोध-प्रदर्शन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। मंझनपुर स्थित विद्युत उपकेंद्र पर आयोजित सभा के दौरान संगठन के संयोजक मुरलीधर ने कहा कि जब तक बिजली के निजीकरण का फैसला वापस नहीं हो जाता उनका आंदोलन जारी रहेगा। इधर, भारतीय किसान यूनियन ने धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।
भाकियू जिलाध्यक्ष नूरूल इस्लाम ने कहा कि निजीकरण के कारण बिजली पूंजीपतियों के अधीन हो जाएगी। इस दौरान सर्व सम्मिति से फैसला लिया गया कि मौजूदा समय कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है। इसलिए जिला अस्पताल की आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान नहीं किया जाएगा। यहां पर बने एल-टू अस्पताल में संक्रमित मरीजों को भर्ती किया गया है। बैठक के दौरान अवधेश कुमार, धीरज यादव, रुद्रेश पांडेय, विनम्र पटेल, प्रभात कुमार, कपिल तिवारी, अतुल श्रीवास्तव, आशीष मौर्या, गौरव श्रीवास्तव, राघवेंद्र सिंह, ज्वाला सिंह, संदीप मिश्रा, शिवमणि त्रिपाठी, देवेंद्र राजपूत आदि लोग मौजूद रहे।
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आउटसोर्सिंग कर्मियों के हवाले की गई बिजली
सोमवार से बिजली कर्मियों की अनिश्चिकालीन हड़ताल के कारण बिजली व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। जिले भर में बिजली कर्मियों के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस और प्रशासनिक अमला मंगलवार को आउटसोर्सिंग कर्मियों पर दबाव बनाने में जुट गया। आउटसोर्सिंग कर्मियों के जरिए मंगलवार को जिले के कुछ इलाकों में आपूर्ति बहाल कराई गई।
बिजली कर्मियों के कार्य बहिष्कार से नगर और ग्रामीण इलाके में आपूर्ति बाधित रही। जिला मुख्यालय मंझनपुर के एक तिहाई हिस्से में सोमवार दोपहर से लेकर 27 घंटे तक बिजली गुल रही। रात को भाजपा नेता प्रेमचंद्र चौधरी व नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष अंशुल केसरवानी ने उपकेंद्र पहुंच कर आपूर्ति चालू किए जाने का दबाव बनाया। पॉवर हाउस में लोगों के जमघट होने की जानकारी पर एसडीएम सदर राजेश चंद्रा व इंस्पेक्टर मंझनपुर मनीष पांडेय भी पहुंच गए।
पुलिस और प्रशासन ने लोगों को समझा-बुझाकर वापस किया। इस दौरान सिर्फ गांधी नगर मोहल्ले को आपूर्ति दी जा सकी। यहां तक कि कलक्ट्रेट फीडर भी चालू नहीं हो सका। जगह-जगह आपूर्ति बाधित होने से अफसरों की टीम आउटसोर्सिंग पर लिए गए कर्मियों पर दबाव बनाने के लिए निकल पड़ी। मंझनपुर उपकेंद्र में एसडीएम ने ठेकेदार धनंजय त्रिपाठी को बुलाकर तत्काल लाइनमैन व एसएसओ की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इसके बाद दोपहर करीब दो बजे मुख्यालय की आपूर्ति शुरू की जा सकी। जिले के अधिकांश उपकेंद्र में भी यही प्रयोग किया गया। इसके बाद भी जिले के ज्यादातर हिस्सों में देर शाम तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी।