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Kaushambi News: भारतीय सेना के अदम्य साहस से हर नागरिक सुरक्षित

Sun, 27 Jul 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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कारगिल विजय दिवस पर भरवारी कस्बे में अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद में अपने विचार व्यक्त करते
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कारगिल विजय दिवस पर शुक्रवार को भरवारी कस्बे में अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों ने वीर जवानों के बलिदान को याद कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। पूर्व सैनिकों ने कहा कि भारतीय सेना के अदम्य साहस की बदौलत देर का हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करता है।
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26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में दुश्मन देश को धूल चटाई थी। दुश्मन को मात देने के लिए बर्फीले पहाड़ों को अपने पराक्रम से रौंदकर शिखर पर तिरंगा फहराया था। विजय दिवस के गवाह रहे योद्धाओं ने इस संघर्ष गाथा को गौरव के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र के इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से सारे कारक और परिस्थितियां शत्रु सेना के पक्ष में थीं।
इसके बाद भी भारत मां के सपूतों ने अदम्य साहस, रण कौशल, दृढ़ इच्छाशक्ति से तिरंगा फहराया। पूर्व सैनिकों ने कहा कि आज के युवाओं को सेना के प्रति जागरूक करना होगा क्योंकि वर्तमान युवा पीढ़ी इससे बिलकुल दूर है। उसे नहीं पता कि सेना क्या है, सैनिकों का सम्मान कैसे करें, देश को सेना की क्यों जरूरत है। इन तमाम विषयों को लेकर कोचिंग सेंटर और स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को बताने की आवश्यकता है।
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पहले सैनिकों को सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं लेकिन अब दौर बदल चुका है। जवानों को बेहतर अस्पताल, कैंटीन, पार्किंग समेत अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। अनुशासन सेना का एक अनिवार्य पहलू है।


रातों रात सोनमर्ग रूट पर पहुंचने के बाद सभी को कारगिल की तरफ भेजा गया। ज्यों ही आगे बढ़े आरटी गोले से बमबारी होने लगी। सभी जवान मोर्चा लेने के लिए गाड़ियों से उतर कर 15 किमी पैदल चले। तब सवेरा होने पर सूचना मिली कि पहाड़ियों के बीच में पूरी बटालियन को एकत्र होना है। 18 ग्रेनेडियर बटालियन के ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर (तत्कालीन कारगिल युद्ध के दौरान सीओ) ने सबको बताया कि कुछ बड़ा होने वाला है। सभी को बहादुरी से काम लेकर दुश्मनों को सबक सिखाना है। सभी जवान कारगिल युद्ध विजय प्राप्त करने तक डटे रहे। -हवलदार दशरथ करवरिया, (रि.)

जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग सेक्टर में दुश्मनों के बंकरों को तबाह किया गया। 19 जून को एक टुकड़ी ने सैनिकों को लेकर दुश्मनों की सेना के 17 जवानों को ढेर कर दिया। दुश्मनों के गोला-बारूद, गन मशीन सहित अन्य कई हथियारों को कब्जे में ले लिया। इस दौरान दुश्मनों के दूसरे पोस्ट से फायरिंग होने लगी थी। इससे उनके दाहिने कंधे में गोली लगी थी। बहादुरी के लिए जीओसी ने दस हजार रुपये का इनाम दिया था।-हवलदार शंकरलाल, (रि.)

सेना के कमांडर के एक इशारे पर जवानों को मरना-मिटना होता है। हर एक युवा को आगे आकर देश के लिए कुछ कर दिखाना चाहिए। कारगिल दिवस आंखों को नम कर देना वाला दिन है। बात करें योगेंद्र यादव, संजय कुमार या फिर विक्रम बत्रा की तो इन सभी की वीरगाथा सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इन सभी के बारे में आज के युवा जानेंगे तो उनकी भी इच्छा सेना में सेवा देने की होगी।- नरेंद्र कुमार तिवारी, सूबेदार मेजर (रि.)
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