चायल (कौशाम्बी)। रेलवे के ठेकेदार से विद्युत तार हटाने के नाम पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए मनौरी विद्युत उपकेंद्र के अवर अभियंता को मंगलवार सुबह विजिलेंस टीम ने रंगेहाथ पकड़ लिया। भ्रष्टाचार का केस दर्ज कराने के बाद उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर मालगाड़ी के लिए अलग से लाइन बिछाई जा रही है। इस लाइन के बीच आने वाले विद्युत तारों को भी शिफ्ट किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कार्यदायी संस्था डेडीकेट फेंट कॉरीडोर (डीएफसी) के ठेकेदार राजेन्द्र सिंह ने मनौरी क्षेत्र में तार लगाने के लिए विद्युत पोल गाड़ने व लाइन के बीच पड़ रहे तारों को हटाने के लिए बिजली विभाग को महीने भर पहले पत्र दिया था। आरोप है कि मनौरी उपकेन्द्र में तैनात अवर अभियंता शिवबाबू निषाद ने इसके लिए ठेकेदार से 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
ठेकेदार ने घूस देने से इनकार किया तो जेई ने काम करने से मना कर दिया। इसपर ठेकेदार ने मामले की शिकायत डीएम मनीष कुमार वर्मा से कर दी। डीएम ने एसपी को कार्रवाई कराने का निर्देश दिया। इसके बाद एसपी प्रदीप गुप्ता ने विजिलेंस टीम से संपर्क किया। विजिलेंस के प्रभारी निरीक्षक आरके श्रीवास्तव की अगुवाई में एक टीम का गठन हुआ। जिला प्रशासन की ओर से भी एक टीम बनाई गई। जिसमें पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीडी पाठक, व डीएफओ ओपी अंबष्ट शामिल किए गए। मंगलवार को योजनाबद्ध तरीके से ठेकेदार अवर अभियंता के पास 20 हजार रुपये लेकर पहुंच गया। हाथ में रकम लेते ही विजिलेंस टीम ने अवर अभियंता को गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस टीम के प्रभारी निरीक्षक ने उनके खिलाफ पूरामुफ्ती कोतवाली में भ्रष्टाचार का केस दर्ज कराया है। दिल्ली-हावड़ा रूट देश के व्यस्ततम रेल मार्गों में से एक है। इस मार्ग से हर दिन करीब 350 सवारी गाड़ी और 150 मालगाड़ी गुजरती है। ट्रेनों की संख्या अधिक होने की वजह से हर रोज लगभग 250 ट्रेनें लेट होती हैं। इसी वजह से रेलवे प्रशासन मालगाड़ी के लिए अलग ट्रैक बना रहा है।