मुख्यालय स्थित कलक्ट्रेट और विकास भवन परिसर में खुले पड़े इलेक्ट्रिक चैंबर किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। दफ्तरों में रोजाना सैकड़ों कर्मचारी और दूर-दराज से आने वाले फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी से हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। कई स्थानों पर चैंबर के ढक्कन टूटे या पूरी तरह गायब हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि बारिश के दिनों में हालात और भी गंभीर हो जाती है। खुले चैंबरों में पानी की सीलन होने के कारण करंट फैलने की आशंका बनी रहती है। कई बार इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया गया, लेकिन अब तक इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया।
शिकायतें लेकर अधिकारियों के पास आते हैं, लेकिन परिसर में फैली अव्यवस्थाओं से खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। शाम के समय रोशनी कम होने पर खुले चैंबर दिखना मुश्किल हो जाता है, जिससे गिरने या करंट की चपेट में आने का खतरा और बढ़ जाता है। -जयदीप यादव, फरियादी कोड़र मंझनपुर
अपनी शिकायतों को भूलकर हमें इन खुले हुए बोर्ड और तार पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। आते जाते करंट की चपेट में आने का डर बना रहता है। भूपेंद्र दुबे, फरियादी मंझनपुर
खुले इलेक्ट्रिक बोर्ड बने खतरे की वजह
:: विकास भवन परिसर के तीसरे तल सहित अन्य कई स्थानों पर इलेक्ट्रिक बोर्ड खुले और असुरक्षित अवस्था में लगे हुए हैं। इसी तरह कलक्ट्रेट परिसर में कोषागार कार्यालय के सामने, शस्त्र विभाग के पास और आसपास के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। इन स्थानों पर कर्मचारियों और फरियादियों की लगातार आवाजाही बनी रहती है, जिससे हर समय हादसे की आशंका बनी हुई है।
विकास भवन व कलक्ट्रेट में खुले चैबंरों की नए स्तर से रिपेयरिंग के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट आते ही तत्काल इसे सही करा दिया जाएगा। - विनोद राम त्रिपाठी, सीडीओ
कलक्ट्रेट परिसर में शस्त्र विभाग के पास खुला इलेक्टि्रक बोर्ड। संवाद
कलक्ट्रेट परिसर में शस्त्र विभाग के पास खुला इलेक्टि्रक बोर्ड। संवाद
कलक्ट्रेट परिसर में शस्त्र विभाग के पास खुला इलेक्टि्रक बोर्ड। संवाद
कलक्ट्रेट परिसर में शस्त्र विभाग के पास खुला इलेक्टि्रक बोर्ड। संवाद