पिछले चुनाव में 50 प्रतिशत से कम वोटिंग वाले बूथों पर आयोग की निगाहें टिक गई हैं। ऐसे करीब 28 बूथ अभी तक चिह्नित हुए हैं, जहां 50 फीसदी से कम मतदान हुआ था। ऐसा क्यों हुआ? मतदाता निकले नहीं या इनको रोका गया था? इसका जवाब आयोग ने मांगा है। इसका जवाब देने की तैयारी अफसरों ने शुरू कर दी है, साथ ही इन बूथों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए अफसरों की टीम भी सक्रिय हो गई है।
विधान सभा सामान्य निर्वाचन 2012 व लोकसभा चुनाव वर्ष 2014 में मतदाताओं की तुलना में 50 फीसदी से कम वोट पड़ने वाले बूथ इस बार आयोग के निशाने पर हैं। निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन से इसका कारण स्पष्ट करने की पहल की है। माना जा रहा है कि इन बूथों के मतदाता वोटिंग को लेकर जागरूक नहीं है या फिर और किसी कारण से मतदाता बूथों तक नहीं पहुंचे। यह भी आशंका जताई जा सकती है कि किसी के इशारे पर इन मतदाताओं को मतदान से रोका तो नहीं गया। आयोग के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी अखंड प्रताप सिंह द्वारा दोनों चुनावों में 50 फीसदी से कम मतदान वाले बूथों की सूची तैयार कराई जा रही है। अब तक 28 ऐसे बूथ मिले हैं, जिनमें पिछले विस व लोक सभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत 50 फीसदी से कम रहा। इन बूथों पर जिलास्तरीय अधिकारियों की टीम भेजी जा रही है।
इसकी जिम्मेदारी विधान सभा सिराथू में डिप्टी आरएमओ विनीता मिश्रा, मंझनपुर में खाद्य सुरक्षा अधिकारी शेफाली रस्तोगी व चायल विस सीट में सहायक अर्थ एवं संख्याधिकारी बबिता सिंह को सौंपी गई है। जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर तीनों विधानसभाओं में अफसरों की टीम संबंधित बूथ वाले गांव पहुंचकर मतदाताओं से कम मतदान का कारण खंगालने में जुट गई है। उधर दोनों चुनाव के बूथों की संख्या विधानसभावार स्पष्ट होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर जागरूकता अभियान चलेगा।
तीन अफसरों को की जा रही रिपोर्टिंग
पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रतिदिन रिपोर्टिंग तीन अफसरों को टीम द्वारा की जा रही है। इसमें मुख्य विकास अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक व एआईजी स्टाम्प शामिल हैं। तीनों अफसरों की संयुक्त टीम को प्रतिदिन देर शाम तक रिपोर्ट दे दी जाती है।