भारत निर्वाचन आयोग की अधिसूचना लगते ही विकास परियोजनाओं पर ब्रेक लग गया है। प्रधानमंत्री आवास, दुग्ध डेयरी, कुक्कुट पालन समेत दर्जनभर परियोजनाओं की पत्रावलियों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसके अलावा सरकारी निर्माण कार्य जो अब तक शुरू नहीं हो सके थे, वह भी अब चुनाव बाद ही शुरू कराए जाएंगे। आयोग की अधिसूचना जारी होते ही अफसरों ने लाभार्थीपरक योजनाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया है।
विधान सभा सामान्य निर्वाचन वर्ष 2017 के लिए बुधवार की दोपहर निर्वाचन आयोग ने बिगुल फूंक दिया है। सात चरणों में चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए आदर्श आचार संहिता को पूर्ण रूप से प्रभावी कर दिया गया है। इसके साथ व्यक्तिगत लाभ पहुंचाई जाने वाली परियोजनाएं, जिन्हें अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी थी। उनको रोक दिया गया है। अब चुनाव बाद ही इस पर नए सिरे से पहल होगी।
जिन योजनाओं पर आदर्श आचार संहिता विशेष रूप से प्रभावी है उसमें प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, कामधेनु, मिनी कामधेनु की बैंकों में लंबित पत्रावलियां, कुक्कुट पालन की फाइलें, प्रधानमंत्री ग्रामीण रोजगार, खादी ग्रामोद्योग अंतर्गत लिए जाने वाले ऋण, सरकारी भवनों का निर्माण जिनकी शुरुआत नहीं हो सकी आदि शामिल हैं। इसके अलावा पंचायती राज विभाग द्वारा शौचालय सहित राज्यवित्त व अन्य विकास योजनाओं की फूटी कौड़ी एक भी ग्राम सभा को नहीं भेजी जा सकेगी और न ही किसी एक भी व्यक्ति को शौचालय के लिए लाभान्वित किया जा सकेगा। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि आदर्श आचार संहिता सिर्फ मनरेगा पर प्रभावी नहीं होगी। क्योंकि यह मामला मजदूरों की जीविका से जुड़ा है।