महेवाघाट पर चल रही संगीतमय रामकथा मानस रत्नावली में सातवें दिन शुक्रवार को संत मोरारी बापू ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को बताया। उन्होंने व्यक्ति के जीवन में आठ प्रकार की शुद्धि की आवश्यकता बताई। बापू ने कहा कि वाणी, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार व कर्म आदि की शुद्धि जरूरी है।
यमुना सेतु के रूप में प्रवाहमान है जो तीन वस्तुएं देती है और तीन वस्तुओं का नाश करती है। प्रवाह हमेशा प्रेरणाप्रद एवं मार्गदर्शक होता है। यमुना का स्वभाव प्रेम को बढ़ाना है। इसी कारण दोनों के बीच निरंतर प्रेम की वृद्धि हुई। हमारे ग्रंथों में अष्ठ सिद्धि और नवनिधि की बड़ी महिमा है और यमुना सकल सिद्धि की दाता हैं। रामकथा स्वभाव पर काम कर रही है। राम ने जन्म लेकर जगत को प्रकाशशील किया। हनुमानजी हर जगह मौजूद हैं। रामकथा में पवन का होना ही मेरी समझ में पवन पुत्र का होना है। रामकथा में हनुमानजी वायु रूप में हैं। उपासना पद्धति आपकी कोई भी हो लेकिन आपका हर कर्म सत्कर्म होना चाहिए। फिर चाहे आप हनुमान को मानें या रहमान को। जीवन को ऐसा बनाओं कि हमारे माता पिता, परिवार व समाज को हमारा स्वभाव अच्छा लगे। गुरू को हमारा स्वभाव अच्छा लगना चाहिए। पिता पुत्र में बड़ा फर्क पड़ गया है। लेकिन मूल समान है। पुत्र पिता के समान नहीं है तो उसका पुत्रत्व अधूरा है। स्वभाव को हमेशा अध्ययन करना तथा जांचना चाहिए। रामकथा के मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, रविन्द्र जोशी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल, प्रकाश पुरोहित सहित कई गणमान्य लोगों ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण का लाभ लिया।