हजरतगंज वार्ड स्थित मीरा मियां के इमामबाड़े में शनिवार रात महफिल जश्ने ईद-ए-जहरा का आयोजन हुआ। इसमें नामचीन शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश कर जश्न में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम रात आठ बजे शुरू हो कर देर रात तक चला।
मौलाना कौसर अब्बास ने तकरीर करते हुए बताया कि जब अली असगर के कातिल हुर्मुला को अदालत ने मौत की सजा दी तो हमारे चौथे इमाम जैनुल आब्दीन अलैहिस्सलाम के चेहरे पर वाकये कर्बला के बाद पहली बार मुस्कुराहट आई थी। उसी याद को ताजा करने के लिए हम जश्ने ईद-ए-जहरा मनाते हैं। मुख्य अतिथि मौलाना जमीर हैदर ने भी जश्ने ईद-ए-जहरा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। तकरीर के बाद शेरो शायरी का दौर शुरू हुआ। सबसे पहले शबीह गोपालपुरी ने अपना कलाम पेश किया। उन्होंने पढ़ा-मिटाए क्या कोई नक्शो निगारे फातिमा जहरा, हुसैन इब्ने अली हैं शाहकारे फातिमा जहरा। इसके बाद सज्जाद हल्लौरी ने नज्म पढ़ी-अब भी आबाद ईदे जहरा है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे शायर बेताब हल्लौरी ने पढ़ा-ईदे जहरा मनाएंगे हम भी, अपना ईमां सजाएंगे हम भी, मुस्कुराए थे आज चौथे इमाम, इसलिए मुस्कुराएंबे हम भी। कार्यक्रम में डॉ. नायाब बलियावी, जफर आजमी सहित तमाम शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए।