नवरात्र पर नौ दिनों तक पूजा पंडालों में पूजीं गई मां दुर्गा देवी की प्रतिमाओं का गगनभेदी जयकारों के बीच विसर्जन शुरू हो गया है। मंगलवार की सुबह से लेकर देर शाम तक 730 में 690 मूर्तियों का विसर्जन विभिन्न तालाबों, चेकडैमों और नहरों में किया गया। बची हुई मूर्तियों का विसर्जन बृहस्पतिवार को निर्धारित स्थलों पर भक्तों द्वारा किया जाएगा।
शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र सोमवार को हवन और कन्याभोज के साथ समाप्त हो गया। शारदीय नवरात्र में मां की आराधना कलश स्थापना के अलावा पूजा पंडालों में देवी की मूर्तियां स्थापित करके की जाती है। पुलिस आंकड़ों के मुताबिक इस बार शारदीय नवरात्र पर जिलेभर में पूजा के लिए कुल 730 मूर्तियों की स्थापना विभिन्न पंडालों में की गई थी। पूजा पंडालों में नौ दिनों तक विधि-विधान से मां के नौ स्वरूपों का भक्तों ने पूजन-अर्चन किया। नौवीं को हवन करने के बाद मंगलवार विजय दशमी के दिन भक्तों ने प्रतिमाओं का विसर्जन सुबह से शुरू किया। नाचते-गाते भक्त निर्धारित तालाबों, ससुर खदेरी और किलनहाई नदी पर बने चेकडैम व नहरों में देर शाम तक मूर्तियों का विसर्जन किया।
मंझनपुर, करारी, विजिया, पइंसा, अफजलपुर वारी, नारा, पश्चिमशरीरा, भरवारी, मूरतगंज, पिपरी, चायल, तिल्हापुर मोड़, चरवा, पुरामुफ्ती, मनौरी, सिराथू, कड़ा, देवीगंज, ओसा, टेंवा, म्योहर आदि स्थानों पर सजे अधिकतर पूजा पंडालों की मूर्तियां मंगलवार को विसर्जित की गई। एसपी वीके मिश्र ने बताया कि मंगलवार की शाम तक 730 में से 690 मूर्तियों का विसर्जन कराया जा चुका है। शेष बची 40 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन बृहस्पतिवार को भक्तों द्वारा किया जाएगा।