बुनियादी शिक्षा नए सत्र की शुरुआत में ही लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। माह का पहला पखवारा बीत गया पर जिम्मेदार स्कूलों में बच्चों को शत-प्रतिशत ड्रेस व किताबों का वितरण नहीं कर सके। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब अभी तक किताब व ड्रेस का वितरण नहीं हो सका तो शिक्षा की अलख कब से जलाई जाएगी। इसे लेकर अविभावक चिंतित हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग ने नए शिक्षण सत्र की शुरुआत एक जुलाई से बड़ी ही गर्मजोशी के साथ की। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने जिलास्तर पर रैली निकलवाकर बच्चों को स्कूल भेजने का संदेश जन-जन को दिया। इस क्रम में जिले भर की ग्राम सभाओं में स्कूल चलो अभियान रैली निकाली गई। इसके अलावा बच्चों को ड्रेस व किताबों का वितरण भी बड़े ही उत्साह के साथ शुरू किया गया। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निर्देश जारी किया था कि 15 जुलाई तक शत-प्रतिशत नामांकन, ड्रेस व किताब वितरण कराना सुनिश्चित करें।
मगर बेसिक शिक्षा की बुनियाद सत्र की शुरुआत में ही हिलती नजर आ रही है। 15 जुलाई तक स्कूलों में महज 70 फीसदी ड्रेस वितरण किया जा सका। बानगी के तौर पर बीआरसी सरसवां के स्कूलों को लिया जा सकता है। यहां पर कुल 117 प्राथमिक व 65 जूनियर विद्यालय हैं। इनमें पढ़ने वाले 30 फीसदी बच्चों को आज तक ड्रेस नहीं मिल सकी है। किताबों का वितरण भी आधा-अधूरा होने से शिक्षण कार्य पूरी तरह से बाधित है।
चार कक्षा के छात्रों को नहीं मिली एक भी किताब
बेसिक शिक्षा विभाग पखवारे भर से स्कूलों में किताबों का वितरण कर रहा है। बीआरसी सरसवां के स्कूलों में कक्षा दो, तीन, सात व आठ के छात्र-छात्राओं को एक भी किताब नहीं बांटी गई। इस बाबत स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि ऊपर से किताबें आई ही नहीं हैं। जो मिली थी उनका वितरण करा दिया गया है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेसिक शिक्षा की बुनियाद कितनी मजबूत बनाई जा रही है।
मेन्यू के हिसाब से नहीं बन रहा मध्याह्न भोजन
नए शिक्षण सत्र की शुरुआत स्कूलों में होने के बाद बच्चों के लिए बनने वाले मध्यान्न भोजन में खेल किया जा रहा है। स्कूलों में बच्चों को आए दिन तहरी ही परोसी जा रही है। इस बात की पुष्टि पिछले दिनों स्कूलों के सत्यापन के दौरान अफसरों ने भी की। बावजूद इसके कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। बीएसए महाराज स्वामी भी मामले में फिलहाल कुछ करते नहीं दिख रही हैं। बानगी के तौर पर प्राथमिक विद्यालय बैरागीपुर को लिया जा सकता है। यहां पर बच्चों को पखवारे भर से तहरी ही परोसी जा रही है।