मेडिकल कॉलेज में मरीज की आंखों की जांच करते डॉ. हेमंत यादव। संवाद
मोबाइल फोन आज मनोरंजन और काम दोनों का अहम साधन है। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इसका उपयोग कर रहे हैं। लेकिन लगातार मोबाइल फोन, टैब और लैपटॉप की स्क्रीन देखने से आंखों पर असर पड़ रहा है और लोग मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) का शिकार हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रीन देखते समय लोग पलक झपकाने पर ध्यान नहीं देते। सामान्य स्थिति में एक मिनट में 13 से 15 बार पलक झपकती है जबकि मोबाइल देखते समय यह घटकर सिर्फ दो से तीन बार रह जाती है।
इससे आंखों की नमी सूखने लगती है और धीरे-धीरे खुजली, जलन व धुंधलापन बढ़ने लगता है। यही मायोपिया का शुरुआती लक्षण है। अस्पताल के नेत्र विभाग की ओपीडी में पहुंचे 150 से अधिक मरीजों में से 10 से 15 मरीजों को धुंधला दिखने, जलन और खुजली की शिकायत रही। डॉक्टरों ने दवाओं के साथ मरीजों को एहतियात बरतने की सलाह दी।
अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. हेमंत यादव ने बताया कि लगातार स्क्रीन देखने से आंख की नमी घट जाती है। मोबाइल फोन अब दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है लेकिन इसका अति प्रयोग नुकसानदायक साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि विटामिन ए से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां और दूध का सेवन आंखों के लिए फायदेमंद है।
शुरुआती चरण में बरतें सावधानी
डॉ. यादव ने कहा कि मायोपिया कोई बड़ी समस्या नहीं है। अगर शुरुआती चरण में ध्यान दिया जाए तो इसे रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि मोबाइल या लैपटॉप को हमेशा एक निश्चित दूरी से देखें। लगातार स्क्रीन देखने की स्थिति में चश्मा पहनें। हर घंटे कम से कम पांच मिनट के लिए आंखों को आराम दें। ठंडे पानी के छींटे मारने से आंखों को राहत मिलती है।