दोआबा में आयुर्वेद चिकित्सा के नाम पर मरीजों के साथ धोखा हो रहा है। अस्पताल में दो साल से महिला और पुरुष चिकित्सकों की तैनाती तो है, लेकिन दवा का आवंटन नहीं किया गया। ऐसे में आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ लेने वाले मरीजों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है। जिम्मेदार हैं कि मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
दोआबा के बीमार लोगों को आयुष चिकित्सा का लाभ देने के लिए शासन के निर्देश पर संविदा चिकित्सकों की तैनाती दो साल पहले की गई। आठ सीएचसी और दो पीएचसी में दस-दस महिला व पुरुष चिकित्सक तैनात हैं। संविदा पर तैनात आयुष चिकित्सकों के पास मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। चिकित्सक उन्हें देखते भी हैं पर दवा के अभाव में उन्हें अस्पताल से बैरंग लौटना पड़ता है। बानगी के तौर पर सीएचसी बारा को लिया जा सकता है।
यहां संविदा पर आयुष चिकित्सक डॉ. मनोज त्रिपाठी और डॉ. कौशल की तैनाती है। इन चिकित्सकों से इलाज कराने के लिए प्रतिदिन मरीज आते हैं। चिकित्सकों द्वारा मरीजों को देखने के बाद बाहर से दवा का पर्चा लिख दिया जाता है। अस्पताल के एक जिम्मेदार ने बताया कि जब से आयुष चिकित्सकों की तैनाती अस्पतालों में की गई है, तब से आज तक होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं की खेप अस्पतालों में नहीं आई। इससे आयुष चिकित्सा सेवा लेने वाले मरीजों का हाल बेहाल है। जिम्मेदार हैं कि वह मामले में पूरी तरह से चुप्पी साधे रहते हैं।
पहले दवाएं क्यों नहीं खरीदी गई, इसकी जानकारी नहीं है। मौजूदा समय में आयुष चिकित्सा की दवाएं खरीदे जाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही खरीदारी कर अस्पतालों को दवाओं की डिलेवरी करा दी जाएगी।
एके उपाध्याय, सीएमओ कौशाम्बी