जिला अस्पताल का नजारा बुधवार को बदला-बदला सा दिखा। अस्पताल में मरीज तो दिखाई दे रहे थे, लेकिन फार्मासिस्ट दिखाई नहीं दे रहे थे। हड़ताल के चलते अस्पताल में एक भी फार्मासिस्ट नहीं आए थे। डॉक्टर आए तो थे लेकिन वह आराम फरमा रहे थे। इसके चलते मरीज भटक रहे थे।
संयुक्त जिला चिकित्सालय समेत जनपद के अन्य सीएचसी व पीएचसी के फार्मासिस्ट मांगों को लेकर 20 सितंबर से कलम बंद हड़ताल कर रहे हैं। हालांकि हड़ताल के पहले ही दिन अस्पताल में डीएम एपी सिंह पहुंच गए। उन्होंने फार्मासिस्टों को हड़ताल खत्म करने की बात कही थी लेकिन वह नहीं माने। इस पर उन्होंने मरीजों की समस्या को देखते हुए अस्पताल में पीएसी व पुलिस ने जवान तैनात कर दिए। जानकारी होने पर फार्मासिस्टों ने अस्पताल की तरफ रुख ही नहीं किया।
उनके नहीं पहुंचने से सारा बोझ चिकित्सकों के ऊपर आ गया। एकाएक मरीजों की भीड़ देख वह भी हैरान हो गए। कुछ देर काम करने के बाद वह आराम करने के लिए अपने कक्ष में चले गए। इसके चलते अस्पताल में चारों तरफ बस मरीज ही मरीज दिखाई दे रहे थे। सीएमएस डॉक्टर सौभाग्य प्रकाश का कहना है कि फार्मासिस्टों के हड़ताल पर होने के कारण समस्या बढ़ी है। हड़ताल खत्म होने के बाद समस्या नहीं होगी। यदि डॉक्टर लापरवाही करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एक्सरे कक्ष में दिखी भीड़
वक्त सुबह के 11:20 बजे, स्थान एक्सरे कक्ष। यहां पर मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिली। पर्ची जमा करने के बाद मरीजों को अंदर तो बुला लिया गया, लेकिन एक्सरे नहीं किया जा रहा था। पीड़ित राजेश, जीतलाल व हिमांशु आदि ने बताया कि वह एक घंटे से बैठे हैं। टेक्नीशियन ने बताया कि स्टाफ कम है।
एंटी रैबीज के लिए भटकते रहे मरीज
समय सुबह के 11:48 बजे, स्थान एंटी रैबीज इंजेक्शन कक्ष। यहां पर कुत्ता काटने पर लोग इंजेक्शन लगवाने के लिए आते हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं थे। इब्ने हसन, मुकेश व सूरज ने बताया कि आधे घंटे से कक्ष के बाहर बैठे हैं। कोई चिकित्सक नहीं आया।
अवकाश पर दंत रोग विशेषज्ञ
समय सुबह 11:51 बजे, स्थान प्रथम तल में स्थित दंत रोग विशेषज्ञ का कक्ष। यहां पर डॉक्टर रमाकांत श्रीवास्तव की तैनाती है। वह पिछले कई दिनों से अस्पताल नहीं आ रहे हैं। मरीजों के दांतों की जांच व सलाह देने का काम सहायक करती है। राधा देवी, किताबुन, सुमित्रा ने बताया कि इससे पहले भी वह अस्पताल आई हैं। लाल, पीली दवा देकर वापस कर दिया गया था लेकिन कोई राहत नहीं मिली।