Doaba's sand mafia agrees on unknown accused
मंझनपुर। सपा सरकार में नियमों को ताक पर रखकर अवैध बालू खनन कराने के मामले में सीबीआई ने मंगलवार को कौशाम्बी के पूर्व डीएम सत्येंद्र सिंह यादव समेत दस नामजद व अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसमें जिले के आठ पट्टाधारक शामिल हैं। एफआई में दर्ज ‘अज्ञात’ के ‘खौफ’ से दोआबा के बालू माफिया सहमे हुए हैं। दरअसल पर्दे के पीछे से खेल इन्हीं माफिया ने किया था। ऐसे में इनके दिल की धड़कनें भी बढ़ गई हैं।
सपा शासनकाल के दौरान वर्ष 2012 में यमुना बालू खनन के लिए आवंटित पट्टों को हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया था। इसके बावजूद 2013-14 में जिले के पट्टाधारकों ने तत्कालीन जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सिंह के साथ मिलीभगत कर अवैध खनन किया था। यही नहीं, रही सही कसर वर्ष 2016 में माफिया के सिंडीकेट ने पूरी कर दी थी। सिंडीकेट से जुड़े गुर्गों ने जिले में जमकर अवैध बालू खनन किया। उस समय अवैध खनन के खिलाफ जिले के सामाजिक कार्यकर्ता अमरसिंह यादव ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इसे रोकने की मांग की थी। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। तब से अब तक सीबीआई छह बार जिले का दौरा कर अवैध खनन की जांच कर चुकी है। आखिरी बार 30 जनवरी को सीबीआई की टीम ने तत्कालीन पट्टाधारकों के घर छापा मारा था।
अहम साक्ष्य जुटाने के बाद सीबीआई ने मंगलवार को पूर्व आईएएस अफसर व तत्कालीन जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह समेत दस नामजद व अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया। एफआईआर में दर्ज ‘अज्ञात’ के ‘खौफ’ से दोआबा के बालू माफिया साहम गए हैं। दरअसल जांच के दौरान सीबीआई को पता चला कि जिले के जिन आठ लोगों के नाम प्रकाश में आ रहे हैं, इनमें से चार लोग तो वास्तव में सिर्फ ‘मोहरा’ हैं। असली खिलाड़ी तो पर्दे के पीछे छिपे हैं। सूत्रों के अनुसार सीबीआई टीम को इसके पुख्ता सुबूत मिल चुके हैं। इसीलिए एफआईआर में ‘अज्ञात’ का जिक्र किया गया है। विवेचना में अब पर्दे के पीछे से गोरखधंधे को अंजाम देने वाले असल बालू माफिया पर शिकंजा कसा जाना तय है। इसी वजह से बचाव के लिए माफिया विधि विशेषज्ञों की परिक्रमा लगाना शुरू कर दिए हैं।