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जिले के 11 बालूघाटों पर ताबड़तोड़ छापामारी

Sun, 07 Jun 2015 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, काैश्ाांबी
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मंझनपुर। इलाहाबाद के कमिश्नर, फतेहपुर के डीएम और खनन अफसर के निलंबन से कौशाम्बी के भी अधिकारियों में हड़कंप मचा है। इसी को लेकर शनिवार को खनन अधिकारी ने जिले में यमुना के 11 बालू घाटों पर ताबड़तोड़ छापामारी की। दबिश की खबर लगते ही बालू माफिया घाटों से गायब हो गए। अफसर पट्टाधारकों को अवैध खनन करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देकर लौट आए।
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बतादें कि अवैध बालू खनन को लेकर प्रदेश सरकार के तेवर इन दिनों सख्त हैं। इस सख्ती का असर कौशाम्बी में भी देखने को मिलने लगा है। शनिवार को प्रभारी डीएम सुरेन्द्र कुमार ने खनन अधिकारी डॉ. विजय कुमार मौर्य को भेजकर महेवाघाट, पभोषा, डेढ़ावल, उमरवल, भखंदा, नंदा का पूरा समेत जिले के सभी 11 बालू घाटों की जांच कराई। खनन अधिकारी ने बताया कि छापामारी के दौरान किसी भी घाट पर डंप बालू या जेसीबी से खनन जैसा कुछ नहीं मिला। उन्होंने पट्टाधारकों को नियमानुसार खनन कराने का निर्देश दिया। बताया कि छापामारी का सिलसिला अब लगातार यमुना घाटों पर चलता रहेगा। दावा किया कि जरूरत पड़ी तो रात में भी छापामारी की जाएगी। किसी भी घाट में कोई गड़बड़ी मिली तो सीधे पट्टा निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

ढुलाई के लिए नदी पाटकर बनाया रास्ता
मंझनपुर (ब्यूरो)। बालू के अवैध खनन का मामला गरमाते ही अफसरों ने सरायअकिल के रुसहाई बालू घाट पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है। बताया जाता है घाट के समीप आधी नदी पाटकर रास्ता बना लिया गया है। यहां के अफसरों के मुताबिक यह बांध एनटीपीसी के कर्मचारियों ने बिजली के टावर लगाने के लिए बनाया है। मगर गांववालों की मानें तो बांध पर बालू माफियाओं का कब्जा है। वे इसका इस्तेमाल बालू ढुलाई के लिए कर रहे हैं। हालांकि खनन अधिकारी इससे इंकार करते हैं। उनका कहना है कि ऐसी शिकायत मिली थी। उन्होंने मौके पर जाकर जांच भी की, लेकिन कब्जे की बात गलत निकली। यदि बालू माफिया बांध बनाकर बालू की ढुलाई करते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  
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ओवरलोड ट्रकों को देखकर चलें अफसर
मंझनपुर (ब्यूरो)। प्रभारी डीएम सुरेन्द्र कुमार ने जिले के सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अवैध खनन के साथ ही ओवरलोड ट्रकों पर भी पैनी नजर रखें। किसी को कहीं भी ओवरलोड ट्रक मिले तो कार्रवाई की जाए या फिर स्थानीय पुलिस और एसडीएम को तत्काल जानकारी दी जाए।
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